ऑस्ट्रेलिया सरकार ने सोशल मीडिया ट्रोल्स पर लगाम कसने की कवायद शुरू की है। जानकारों का कहना है कि वहां इसके लिए जो नया कानून बनाने का एलान किया गया है, उसमें दुनिया भर की दिलचस्पी होगी। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की समस्या से दुनिया भर के देश जूझ रहे हैं। उनके बीच ऑस्ट्रेलिया पहला महत्त्वपूर्ण देश बना है, जिसने इस समस्या से निपटने के लिए कानूनी प्रावधान लागू करने का फैसला किया है।
ऑस्ट्रेलिया में बनाए जाने वाले कानून का मकसद सोशल मीडिया कंपनियों को उन यूजर्स की जानकारी देने के लिए मजबूर करना होगा, जो छद्म नाम से अपना अकाउंट चलाते हैं। ज्यादातर मामलों में ऐसे यूजर ही किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर भद्दी गालियां देते हैं और लोगों के बारे में झूठा प्रचार करते हैँ। प्रस्तावित कानून में प्रावधान होगा कि जो सोशल मीडिया कंपनी यूजर की पहचान नहीं बताएगी, उसे जुर्माना भरना होगा।
अपमानजनक, डराने-धमकाने वाले, या बदनाम करने वाले पोस्ट को आपत्तिजनक की श्रेणी में रखा जाएगा। कंपनी में यह साफ प्रावधान होगा कि कोई कंपनी यह कह कर नहीं बच सकेगी कि वह किसी यूजर की पहचान करने में नाकाम रही है। अगर कंपनी ऐसा नहीं कर पाई, तब भी उसे उतना ही दोषी समझा जाएगा, जैसा जानबूझ कर पहचान छिपाने के मामलों में होगा।
ऑस्ट्रेलिया की अटार्नी जनरल मिकेलिया कैश ने कहा है कि नया कानून बनाने की पहल पिछले सितंबर में आए हाई कोर्ट के एक फैसले के अनुरूप है। उस फैसले में कहा गया था कि मीडिया कंपनी उस के प्लैटफॉर्म पर प्रकाशित यूजर्स की टिप्पणियों के भी जवाबदेह है। ये फैसला मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया दोनों के लिए आया था। इस निर्णय के बाद अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन ने ऑस्ट्रेलिया में अपना फेसबुक पेज बंद कर दिया। कैश ने कहा है कि प्रस्तावित कानून से हाई कोर्ट के फैसले के बारे में और स्पष्टता आएगी।