इंटरनेट पर 25 पन्नों की एक पोस्ट भी ऑनलाइन वायरल हो रही है, जिसे पियानचाना का लिखा बताया जा रहा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उनके वरिष्ठों ने उन पर दोषियों पर अपना फैसला बदलने का दबाव डाला था।
अमीरों को राहत और गरीबों को सजा देते हैं कोर्ट
आलोचकों का कहना है कि थाईलैंड की अदालतें अक्सर अमीर और ताकतवर लोगों के पक्ष में काम करती हैं, जबकि मामूली अपराधों के लिए आम लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जाती है।
वहीं, अदालत के एक प्रवक्ता ने बताया कि जज ने ऐसा कदम निजी वजहों के चलते उठाया। जबकि कुछ कानून विशेषज्ञों ने जज के उन आरोपों का समर्थन किया है कि जिसमें कहा गया है कि न्यायपालिका में ऐसी जोड़तोड़ की गतिविधियां होती रही हैं। वहीं, एक और जज ने कहा है कि देश के और भी कई ऐसे जज हैं जो ऐसी दखलंदाजी से पीड़ित हैं। इस बीच, बचाव में उतरी थाईलैंड सरकार ने कहा है कि जज ने अपनी निजी समस्याओं की वजह से आत्महत्या का प्रयास किया है। वह पिछले काफी दिनों से तनाव में थे।