दक्षिण-पूर्व एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। मलयेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने सोमवार को ऐलान किया कि थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने ‘तुरंत और बिना शर्त’ युद्धविराम पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच बीते पांच दिनों से सीमा पर भीषण संघर्ष चल रहा था, जिसमें तोपों और हवाई हमलों का इस्तेमाल हुआ। हालांकि बीते 3 तीन दिन में ये संघर्ष काफी तेज हो गया था।
यह अहम वार्ता मलयेशिया की राजधानी पुतराजया में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के सरकारी आवास पर हुई। बैठक में अमेरिका और चीन के राजदूत भी मौजूद रहे। बैठक का मकसद सीमा पर जारी हिंसा को रोकना और शांति बहाल करना था। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने कहा कि यह पहल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुई और दोनों देशों ने इसे स्वीकार किया।
पांच दिन से चल रही थी भीषण गोलीबारी
थाईलैंड ने जताई थी शांति वार्ता को लेकर शंका
वार्ता से ठीक पहले थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचयाचाई ने कहा था कि उन्हें कंबोडिया की मंशा पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि कंबोडिया ने अब तक जो कदम उठाए हैं, वे समस्या के समाधान के प्रति उनकी गंभीरता पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है, लेकिन हम सभी शांति चाहते हैं।
ट्रंप ने दी थी व्यापार समझौते रोकने की चेतावनी
सीमा पर तबाही के निशान, गांव खाली
संघर्ष से प्रभावित थाईलैंड के सिसाकेत प्रांत में कई गांव खाली कराए गए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक गांव में गोलाबारी से तबाह घर, टूटी बिजली की लाइनें और बंद दुकानें देखी गईं। सड़कें सूनी थीं और सिर्फ सेना की गाड़ियां नजर आ रही थीं। आसमान में समय-समय पर तोपों की आवाजें गूंज रही थीं, जो हालात की गंभीरता को बयान करती हैं।
युद्धविराम के बाद भी भरोसा बहाल करना चुनौती
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना फिलहाल बड़ी चुनौती है। सीमा पर तैनात सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है और एक छोटी सी चिंगारी भी फिर से हिंसा भड़का सकती है। हालांकि मलयेशिया, अमेरिका और चीन की मौजूदगी में हुई यह वार्ता क्षेत्रीय शांति के लिए एक सकारात्मक शुरुआत मानी जा रही है। आसियान देशों की नजरें भी इस समझौते की सफलता पर टिकी हैं।