थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और शुक्रवार को भी दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी हुई। इस संघर्ष में अभी तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। संघर्ष के चलते एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। दोनों तरफ से हमले के लिए गोलीबारी, आर्टिलरी और मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सीमा पर भेजे गए अतिरिक्त सैनिक
शुक्रवार को दोनों ही देशों की सेनाओं ने सीमा पर सैनिकों के अतिरिक्त रेजीमेंट्स भेजे हैं। गुरुवार को कंबोडिया की तरफ से थाईलैंड के सीमा पर स्थित गांवों पर हमला किया गया। इसके जवाब में थाईलैंड की सेना ने एफ-16 फाइटर जेट से कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। हमलों के बाद हिंसा प्रभावित इलाकों से आम लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है।
क्या है दोनों देशों के बीच विवाद, जो संघर्ष में बदला
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। साल 1907 में जब कंबोडिया फ्रांस साम्राज्य के अंतर्गत आता था, तब सियाम और कंबोडिया के बीच सीमाएं तय की गई थीं। हालांकि, आगे चलकर 817 किमी लंबी इस सीमा को लेकर विवाद शुरू हो गए। खासकर कुछ ऐतिहासिक मंदिरों, खासकर 11वीं सदी के प्रीह विहार मंदिर को लेकर दोनों देशों में यह विवाद खासा गहरा गया। दोनों देश इन मंदिरों और इनके आसपास के इलाकों पर दावा करते हैं। दोनों देश का सीमा विवाद और मंदिरों पर अधिकार का मुद्दा 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस- आईसीजे) में भी गया। जहां आईसीजे ने कंबोडिया के पक्ष में फैसला दिया। थाईलैंड ने फैसले के बाद इस मंदिर पर अधिकार छोड़ दिए।
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थाईलैंड ने फैसले के बाद इस मंदिर पर अधिकार छोड़ दिए। हालांकि मंदिर के आसपास के इलाकों को लेकर दोनों देशों में विवाद बना रहा। विवाद के चलते साल 2008 में दोनों देशों में संघर्ष हुआ, जिसमें दोनों तरफ से 20 लोगों की मौत हुई और हजारों लोगों को बेघर होना पड़ा था। इसके बाद कंबोडिया फिर से आईसीजे पहुंचा और आईसीजे ने फिर से कंबोडिया के पक्ष में फैसला सुनाया। इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और दोनों देशों का व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कंबोडिया ने अपने यहां थाईलैंड की फिल्में और टीवी शो प्रतिबंधित कर दिए। साथ ही पड़ोसी देश से ईंधन, फल और सब्जियों का आयात बंद कर दिया। इतना ही नहीं कंबोडिया ने इंटरनेट और ऊर्जा क्षेत्र में भी थाईलैंड का बहिष्कार किया। गुरुवार को तनाव चरम पर पहुंच गया और टकराव शुरू हो गया। दोनों तरफ से गोलीबारी के आरोप लगे। शुक्रवार को यह संघर्ष और गंभीर होता दिख रहा है।
इस विवाद में गई पीएम की कुर्सी
इसी साल जून में थाईलैंड की प्रधानमंत्री पेइतोंग्तर्न शिनावात्रा को अपनी कुर्सी की गंवानी पड़ी थी। दरअसल पीएम ने कंबोडिया के पूर्व पीएम से फोन पर बात की थी, जिसमें पीएम ने अपनी ही सेना की आलोचना की थी। बातचीत का यह ऑडियो लीक हो गया, जिससे पीएम अपने ही देश में घिर गईं और आखिरकार उन्हें पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।
थाईलैंड में भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को अपने नागरिकों के लिए एक सलाह जारी की, जिसमें भारतीयों से थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर जारी संघर्ष के चलते थाईलैंड के सात प्रांतों की यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। भारतीय दूतावास ने एक पोस्ट में लिखा, 'थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर स्थिति को देखते हुए, थाईलैंड जाने वाले सभी भारतीय यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे TAT न्यूजरूम सहित थाई अधिकारियों से अपडेट लेते रहें।' दूतावास ने थाईलैंड पर्यटन प्राधिकरण द्वारा जारी उन स्थानों की सूची भी पोस्ट की है, जहां न जाने की सलाह दी गई है।