आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने एक बार फिर से इराक में पैर जमाने शुरू कर दिए हैं। कोरोना वायरस महामारी और कुछ राजनीतिक समूहों में लड़ाई का फायदा उठाते हुए आईएस ने इराक में अपने हमले तेज कर दिए हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है आईएस ने अब दुश्मन के क्षेत्र में हमलों को अंजाम देने के लिए आतंक का अधिक पारंपरिक रूप अपनाया है। बता दें कि इराक ने दिसंबर 2017 में आईएस पर जीत की घोषणा की थी।
आतंकवादी समूह ने शनिवार को समारा के मध्य शहर के पास रात में हमला किया जिसमें 10 इराकी सैनिकों की मौत हो गई। यह हमला हाल के महीनों में सबसे घातक हमलों में से एक था। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इराक में हाल के महीनों में कई हमले हुए हैं।
पूर्वोत्तर सीरिया में कुर्द बलों को बनाया निशाना
पिछले सप्ताह एक आत्मघाती हमलावर ने उत्तरी शहर किरकुक में एक खुफिया कार्यालय को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम तीन सुरक्षा बल घायल हो गए। आईएस ने हाल के महीनों में पूर्वोत्तर सीरिया में कुर्द लड़ाकों को भी निशाना बनाया है।
नए कमांडर की वजह से हुआ और भी खतरनाक
सैन्य अधिकारी कहते हैं कि हमलों में सुधार और संगठित प्रकृति आईएस के नए नेता अबू इब्राहिम अल-हाशिमी अल-कुरैशी के प्रभाव की वजह से हुई है जिसने अबु बक्र अल-बगदादी की मौत के बाद आतंकवादी समूह का नेतृत्व संभाला है।
अमेरिकी सैनिकों की वापसी से हुआ फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने इस्लामिक स्टेट के पक्ष में काम किया है। खुफिया रिपोर्टों का कहना है कि इराक में आईएस के लड़ाकों की संख्या 2500 से 3000 है।
कोरोना वायरस से मिल रहा फायदा
कोरोना वायरस महामारी का भी आईएस को काफी फायदा मिल रहा है। इराक में संसाधनों का इस्तेमाल को लॉकडाउन लागू कराने के लिए किया जा रहा है। इसी का फायदा उठाकर आईएस हमले कर रहा है। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि ड्यूटी पर इराकी सैन्यकर्मियों की संख्या में 50 फीसदी की गिरावट आई है।