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पाकिस्तान: नींव हिला रहा बलोच विद्रोह, दो वर्षों में बलूचिस्तान में आतंकी गतिविधियों में 30 % से अधिक वृद्धि

Wed, 16 Jul 2025 05:52 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

पिछले दो वर्षों में बलोच विद्रोह की रफ्तार में अभूतपूर्व तेजी आई है। बीएलए और उससे संबद्ध संगठनों ने 2023 और 2024 के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों, अर्धसैनिक इकाइयों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से जुड़ी परियोजनाओं पर सिलसिलेवार हमले किए हैं।
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पाकिस्तान में बलूच विद्रोह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकिस्तान में दशकों से चले आ रहे बलोच विद्रोह ने अब खतरनाक सैन्य चुनौती का रूप ले लिया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) न केवल पाकिस्तान के सुरक्षाबलों को निशाना बना रही है, बल्कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) जैसी अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं को भी पंगु कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह विद्रोह पाकिस्तान की सुरक्षा नीति, आंतरिक स्थिरता व विदेश नीति तीनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

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पिछले दो वर्षों में बलोच विद्रोह की रफ्तार में अभूतपूर्व तेजी आई है। बीएलए और उससे संबद्ध संगठनों ने 2023 और 2024 के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों, अर्धसैनिक इकाइयों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से जुड़ी परियोजनाओं पर सिलसिलेवार हमले किए हैं। पाकिस्तान इंस्टिट्यूट फॉर पीस स्टडीज (पीआईपीए) की ताज रिपोर्ट 2025 के अनुसार इन दो वर्षों में बलूचिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में 30% से अधिक वृद्धि दर्ज हुई है। 2025 के शुरुआती 6 महीनों में यह गतिविधियां बढ़कर 45% से अधिक हो चुकी हैं। कराची यूनिवर्सिटी हमले के बाद बीएलए ने महिला आत्मघाती दस्ते ‘मजीद ब्रिगेड’ को और सक्रिय किया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियां कई गुना बढ़ गई हैं। अब बीएलए न केवल पारंपरिक गुरिल्ला शैली में बल्कि उन्नत रणनीति, शहरी नेटवर्क और साइबर प्रचार के जरिए भी काम कर रही है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ माइकल कुगलमैन (विल्सन सेंटर) कहते हैं, बलूच विद्रोह अब पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक सीमित सुरक्षा चुनौती नहीं रहा, बल्कि यह एक विकसित हो चुका हाइब्रिड विद्रोही नेटवर्क है, जो सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर चुनौती बन गया है।

पाकिस्तानी सेना को हुआ भारी नुकसान
बलोच विद्रोह के चलते पाकिस्तान की सेना को गंभीर सैन्य क्षति उठानी पड़ी है। 2024-25 में यह आवृत्ति और बहुत तेजी के साथ बढ़ी है। पीआईपीएस की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 2020 से 2024 के बीच बलूच उग्रवादी संगठनों द्वारा किए गए 650 से अधिक हमलों में करीब 850 सुरक्षाकर्मी मारे गए जिनमें पाक आर्मी, फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी), और इंटेलिजेंस यूनिट्स के जवान शामिल हैं।
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पाकिस्तान के लिए नासूर बनता बलूच विद्रोह
ब्रिटेन के रक्षा थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टिट्यूट ने चेतावनी दी है कि बलूच विद्रोह अब पाकिस्तान के लिए एक सस्टेन्ड एसिमेट्रिक वारफेयर बन चुका है। एसएटीपी के अनुसार बलूच विद्रोह पाकिस्तान के लिए एक जिंदा ज्वालामुखी है जिसे लगातार दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह और ज्यादा विस्फोटक हो रहा है। विद्रोह अब सिर्फ एक सीमित क्षेत्रीय आंदोलन नहीं रह गया, बल्कि यह पाकिस्तान की भू-राजनीतिक स्थिति, विदेशी निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर रहा है।

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