एफएटीएफ की इस बैठक में हिस्सा ले रहे कूटनीतिक सूत्रों ने बताया था कि एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को तुर्की के अलावा अन्य किसी भी देश से साफ तौर पर समर्थन नहीं मिला है। यहां तक कि उसके सदाबहार दोस्त चीन ने भी फरवरी-2020 में उसका साथ छोड़ दिया था। मोटे तौर पर सदस्य देशों में यह आम राय थी कि आतंकी गतिविधियों तक फंड प्रवाह रोकने का खतरा पाक में पूरी तरह से बना हुआ है।