सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि लश्कर के नए ठिकाने का नाम मरकज जिहाद-ए-अक्सा रखा गया है। इस केंद्र का निर्माण कार्य जुलाई में शुरू हुआ। तस्वीरों से पता चलता है कि यहां मजदूरों की आवाजाही लगातार हो रही है। भवन का पहला तल बनाने का काम जारी है।
ऑपरेशन सिंदूर के डर से पाकिस्तान के आतंकी संगठन अब पीओके से दूर अफगानिस्तान सीमा के निकट अपने ठिकाने बनाने में जुटे हैं। पिछले दिनों अमर उजाला ने जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के ठिकाने खैबर पख्तूनख्वा में शिफ्ट किए जाने की खबर छापी थी।
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अब लश्कर-ए-तैयबा भी अपना नया ठिकाना अफगान सीमा से 47 किलोमीटर दूर लोअर दीर जिले के कुंभन मैदान इलाके में बना रहा है। साफ है कि यह कदम भविष्य में भारत के संभावित हमले से बचने के लिए उठाया गया है। आतंकियों की नजर में अब पीओके असुरक्षित है इसलिए वो भारत से सटे इलाकों से दूर जाना चाहते हैं। खैबर पख्तूनख्वा में ठिकाने बनाने के पीछे आतंकवादियों का मकसद यह है कि यहां के पहाड़ी इलाके में उन्हें छुपने की बेहतर जगह मिल जाती है।
लश्कर का नया केंद्र मरकज जेहाद-ए-अक्सा
सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि लश्कर के नए ठिकाने का नाम मरकज जिहाद-ए-अक्सा रखा गया है। इस केंद्र का निर्माण कार्य जुलाई में शुरू हुआ। तस्वीरों से पता चलता है कि यहां मजदूरों की आवाजाही लगातार हो रही है। भवन का पहला तल बनाने का काम जारी है। जानकारी के मुताबिक यह केंद्र लश्कर की हाल ही में निर्मित जामिया अहले सुन्ना मस्जिद के पास खाली पड़ी जमीन पर बनाया जा रहा है। जमीन का कुल क्षेत्रफल 4,643 वर्ग फीट है। यह कदम धार्मिक संस्थानों की आड़ में आतंकी ढांचे बनाने की लश्कर की नीति के अनुरूप है। सूत्रों ने बताया कि लश्कर का यह नया केंद्र इस साल दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है। लश्कर ने नए आतंकवादियों की भर्ती का काम शुरू कर दिया है।
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नए ठिकानों पर चलेंगे प्रशिक्षण
मरकज जेहाद-ए-अक्सा में दो प्रधान प्रशिक्षण कार्यक्रम दौरा-ए-खास और दौरा-ए-लश्कर चलाए जाएंगे। साथ ही यहां लश्कर की फिदाईन इकाई जान-ए-फिदाई भी होगी। यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 मई को भिंबर-बरनाला में भारत द्वारा मरकज अहले हडीथ सुविधा पर निशाना साधने के बाद लिया गया है।
आतंकी जावेद को सौंपी कमान
केंद्र की कमान नस्र जावेद नाम के आतंकी को सौंपी गई है, जो 2006 में हैदराबाद में हुए धमाके का एक मास्टरमाइंड है। यह आतंकी साल 2004 से 2015 तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लश्कर के दुलाई प्रशिक्षण केंद्र की कमान संभालता था। इन दिनों नस्र जावेद लश्कर की धन उगाही करने वाली शाखा खिदमत-ए-खल्क के साथ सक्रिय है। साथ ही लश्कर ने जेहाद की नई पौध तैयार करने का जिम्मा मोहम्मद यासीन उर्फ बिलाल को सौंपा है। जबकि हथियारों की ट्रेनिंग का काम अनस उल्ला खान के पास है।