फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाकिस्तान में आतंकवादी हमले में 15 लोगों की मौत, इस आतंकी संगठन ने ली जिम्मेदारी

Fri, 16 Oct 2020 02:27 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : For Reference Only
विज्ञापन

पाकिस्तान के अशांत दक्षिणी-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में तेल एवं गैस कर्मियों के एक काफिले को आतंकवादियों ने निशाना बनाया, जिसमें आठ सैनिकों समेत 15 लोगों की मौत हो गई। यह काफिला अर्द्धसैनिक बलों की सुरक्षा में जा रहा था। शुरुआत में हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने ली। लेकिन बाद में एक अन्य उग्रवादी संगठन ने भी हमले का दावा किया। 

विज्ञापन


रेडियो पाकिस्तान की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस हमले की निंदा करते हुए इस पर रिपोर्ट मांगी है। खान ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। 



यह हमला गुरुवार को सरकारी ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (ओजीडीसीएल) के कर्मियों पर ग्वादर जिले के ओरमारा कस्बे में हुआ। 

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा अंतर-सेवा जन संपर्क (आईएसपीआर) ने घटना की पुष्टि की और बताया कि हमले के दौरान गोलीबारी में आतंकवादियों को भी क्षति पहुंची है। इस हमले में फ्रंटियर कोर (एफसी) के आठ सैनिक और सात निजी सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई।
विज्ञापन


ग्वादर में एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया, "आतंकवादियों ने बलूचिस्तान-हब-कराची तटीय राजमार्ग पर ओरमारा के निकट पहाड़ों से काफिले पर हमला किया। घटना के दौरान दोनों ही तरफ से भारी गोलीबारी हुई। यह काफिल ग्वादर से कराची लौट रहा था।" 

उन्होंने बताया कि इस हमले को साजिश रचकर अंजाम दिया गया है और आतंकवादियों को पहले से ही काफिले के कराची जाने की जानकारी दी। वे काफिले की प्रतीक्षा कर रहे थे। एफसी के अन्य कर्मी काफिले को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में सफल रहे।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की मुख्य विकास परियोजनाओं में ग्वादर बंदगार अहम है और सरकारी संस्थानों के अधिकारी तथा विदेश कर्मचारी यहां भारी सुरक्षा के बीच काम करते हैं।

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट क्या है
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की शुरुआत 1970 के दशक में जुल्फिकार अली भुट्टो के शासनकाल में हुई थी। इस आतंकी संगठन ने उस वक्त भी बलूचिस्तान के क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के नाक में दम कर रखा था।

जब सैन्य तानाशाह जियाउल हक ने पाकिस्तान की सत्ता को अपने कब्जे में ले लिया तो उन्होंने बलूच नेताओं से बातचीत की और इस आतंकी संगठन के साथ अघोषित संघर्ष विराम किया। इस संगठन में मुख्य रूप से पाकिस्तान के मिरी और बुगती इन दो जनजाति के लड़ाके शामिल हैं। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें