नेचर जर्नल में छपे शोध के अनुसार, मिलेनोसायट स्टेम कोशिकाएं मिलेनिन का निर्माण करती है। मिलेनिन ही तय करता है कि चमड़ी और बालों का रंग कैसा हो। शोध के दौरान तनाव की स्थिति में चूहे में एड्रिनेलिन और कॉर्टिसोल नामक हॉर्मोन रिलीज हुआ। यही नहीं बल्कि चूहे के दिल की धड़कनें भी तेज हुईं और ब्लड प्रेशर भी बढ़ा। इन बदलाव के चलते सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम प्रभावित हुआ।
कल्पना से अधिक बुरे नतीजे
शोध से जुड़े प्रोफेसर सू का कहना है कि लगातार तनाव होने पर बालों में मिलेनिन बनाने वाली स्टेम कोशिकाओं का क्षरण शुरू हो जाता है। तनाव पूरे शरीर पर इतने बुरे नतीजे छोड़ता है जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी। यह परिणाम हमारी कल्पना से भी ज्यादा बुरे थे, क्योंकि कुछ समय के बाद बालों का रंग तय करने वाली कोशिकाएं स्थायी तौर हमेशा के लिए खत्म हो चुकी थीं।
नई दवा पर काम शुरू
शोधकर्ता अब ऐसी दवा तैयार कर रहे हैं जो बढ़ती उम्र के बाद भी बालों को सफेद होने से रोक सके। चूहों पर अध्ययन के दौरान तनाव रोकने के लिए भी प्रयोग किया गया। इस दौरान चूहों के रक्तचाप को सामान्य करने के लिए एंटी-हायपरटेंसिव दवा दी गई। इसके बाद उनमें प्रोटीन का स्तर घटा और स्टेम कोशिकाओं पर असर कम हुआ। इसी प्रोटीन को कम करने के लिए वैज्ञानिक नई दवा पर भी काम कर रहे हैं।