टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पावेल दुरोव ने महिलाओं को बड़ा अजीबोगरीब प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर कोई महिला उनके स्पर्म का इस्तेमाल कर मां बनना चाहती है तो वे मुफ्त आईवीएफ इलाज करा सकते हैं।
मैसेजिंग एप टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल दुरोव अपने स्पर्म से जुड़े अजीबोगरीब ऑफर के कारण सुर्खियों में हैं। उन्होंने महिलाओं को मुफ्त आईवीएफ की पेशकश की और कहा कि अगर कोई महिला उनके शुक्राणुओं का इस्तेमाल कर मां बनना चाहती है तो वे मदद के लिए तैयार हैं। दुरोव के इस ऑफर का मकसद उन लोगों की मदद करना है जो परिवार बढ़ाना चाहते हैं।
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क्या है आईवीएफ,किन लोगों को मिलती है मदद
प्रजनन विकारों की समस्या मौजूदा समय में काफी आम है, भारत सहित दुनिया के तमाम देशों के लोग इससे प्रभावित देखे जा रहे हैं। ऐसे कपल्स के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। आईवीएफ, नि:संतानता की समस्या को दूर करने में काफी असरदार पाया गया है। आईवीएफ को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 25 जुलाई को वर्ल्ड आईवीएफ डे मनाया जाता है। इसी दिन पहली बार आईवीएफ के माध्यम से बच्ची का जन्म हुआ था। आईवीएफ का उपयोग अक्सर ऐसी महिला की मदद के लिए किया जाता है जो किन्हीं कारणों से गर्भधारण नहीं कर सकती है। हालांकि यह पूरी तरह से सच नहीं है कि सिर्फ निःसंतान दम्पत्तियों के लिए ही आईवीएफ है। यदि आप या आपके साथी में कोई आनुवंशिक विकार है जो आपके बच्चे के स्वास्थ्य और दीर्घायु को प्रभावित कर सकता है तो आप आईवीएफ चुन सकते हैं।
नि:शुल्क आईवीएफ का वित्तपोषण करने की घोषणा
टेलीग्राम प्रमुख पॉवेल डुरोव
- फोटो : अमर उजाला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पावेल दुरोव ने अल्ट्राविटा क्लिनिक के साथ साझेदारी की है। उन्होंने अपने शुक्राणुओं का इस्तेमाल करने पर नि:शुल्क आईवीएफ का वित्तपोषण करने की घोषणा की है। खबरों के मुताबिक दुरोव के स्पर्म दान से अब तक 12 देशों में 100 से अधिक परिवारों को मदद मिल चुकी है। दुरोव को उम्मीद है कि उनकी इस पहल से बदनामी का डर दूर होगा और अधिक से अधिक पुरुष जरूरतमंद परिवारों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
किन महिलाओं को मिलेगा दुरोव की योजना का लाभ
गर्भावस्था
- फोटो : Freepik.com
दुरोव ने शीर्ष प्रजनन क्लिनीक अल्ट्रैविटा के साथ साझेदारी की है। उनकी पेशकश का लाभ केवल ऐसी महिलाओं को मिलेगा जो उनका स्पर्म इस्तेमाल करेंगी। स्पर्म दान के अलावा दुरोव पूरी आईवीएफ प्रक्रिया का खर्च भी उठा रहे हैं। अल्ट्राविटा के पास टेलीग्राम के सीईओ के बायोमटेरियल को संरक्षित करने का विशेष अधिकार है। टेलीग्राम के शीर्ष अधिकारी की पेशकश पर क्लिनिल ने कहा कि आईवीएफ कराने की इच्छुक महिला को सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों की मदद मिलेगी। गर्भधारण और स्वस्थ बच्चा पैदा होने की सफलता सुनिश्चित करने के लिए क्लिनिक नवीनतम तकनीक का उपयोग कर रहा है।
गर्भधारण करने की इच्छुक महिला 37 साल से कम आयु की होनी चाहिए
गर्भावस्था की प्रतीकात्मक तस्वीर
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क्लिनिक की तरफ से जारी बयान के मुताबिक परिवार बढ़ाने की इच्छुक महिलाएं प्रारंभिक परामर्श ले सकती हैं। जरूरी मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर उन्हें आईवीएफ की पूरी प्रक्रिया के बारे में समझाते हैं। क्लिनिक के कुछ मानदंड तय कर रखे हैं, मसलन गर्भधारण करने की इच्छुक महिला 37 साल से कम आयु और अच्छी सेहत की होनी चाहिए। जांच में फिट पाए जाने के बाद क्लिनिक की समर्पित टीम चरणबद्ध तरीके से मदद करेगी।
बिना शादी के 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं
गर्भावस्था
- फोटो : Freepik.com
दुरोव ने अपने टेलीग्राम चैनल पर शुक्राणु दान करने के अपने फैसले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'मुझे अभी पता लगा है कि मेरे 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं।' उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, जिसने शादी नहीं की और अकेले रहना पसंद करता है, ऐसा उस व्यक्ति के लिए कैसे संभव है। उन्होंने बताया कि स्पर्म दान करने की शुरुआत 15 साल पहले हुई जब उनके करीबी दोस्त ने उनसे मदद मांगी। उनकी पत्नी गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं, ऐसे में उन्होंने शुक्राणु दान की अपील की। दुरोव के मुताबिक उन्होंने मदद के लिए हामी भर दी।
शुक्राणु की कमी दुनियाभर में गंभीर मुद्दा, उम्मीद है और पुरुष दान की पहल करेंगे
जनसंख्या और मातृत्व (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : आईस्टॉक / एएनआई
बाद में क्लिनिक के निदेशक ने भी दुरोव को प्रोत्साहित किया। टेलीग्राम के सीईओ ने बताया कि क्लिनिक ने उन्हें बताया कि 'उच्च गुणवत्ता' वाले स्पर्म की कमी है ऐसे में उन्हें अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों की मदद करनी चाहिए। सिलसिला शुरू हो गया और बीते 15 साल में अब तक 12 देशों के 100 से अधिक परिवार उनकी मदद हासिल कर चुके हैं। दुरोव कहते हैं कि शुक्राणु की कमी दुनियाभर में गंभीर मुद्दा बनती जा रही है और उन्हें गर्व है कि वे लोगों की मदद कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि परंपरा को चुनौती देकर नए आदर्श स्थापित करने की जरूरत है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में पुरुष और बड़ी संख्या में स्वैच्छिक शुक्राणु दान करने की पहल करेंगे।