बांग्लादेश की राजनीति में एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पल तब देखने को मिला, जब पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और शहीद राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे तथा बीएनपी नेता तारिक रहमान ने 17 वर्षों बाद देश वापसी के बाद बांग्लादेश की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा। यह पत्र उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया।
अपने संदेश में तारिक रहमान ने लिखा कि मातृभूमि की मिट्टी पर लौटना उनके जीवन का सबसे भावुक क्षण है। उन्होंने कहा कि ढाका की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, लोगों की दुआएं और अपनापन वह कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने जनता के प्यार और सम्मान के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह स्वागत उनके और उनके परिवार के लिए अविस्मरणीय है।
सभी बांग्लादेशियों का जताया आभार
तारिक रहमान ने अपने समर्थकों, नागरिक समाज, युवाओं, किसानों, श्रमिकों और विभिन्न पेशेवर वर्गों का धन्यवाद करते हुए कहा कि बांग्लादेश की असली ताकत उसकी एकजुट जनता में है। उन्होंने मीडिया की भूमिका की भी सराहना की और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले प्रशासनिक तंत्र को धन्यवाद दिया। पत्र में उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों और आंदोलनों के नेताओं के प्रति भी आभार जताया, जिन्होंने उनकी वापसी का स्वागत किया। तारिक रहमान ने लोकतंत्र, बहुदलीय व्यवस्था और बदले की राजनीति से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण राजनीतिक संस्कृति की जरूरत पर जोर दिया।
'यह सपना नहीं, बांग्लादेश के लिए योजना...'
अपने भविष्य के विजन को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका सपना नहीं, बल्कि एक ठोस योजना है एक ऐसा बांग्लादेश जहां शांति, गरिमा और सुरक्षा हो और हर बच्चे को बेहतर भविष्य की उम्मीद मिले। उन्होंने एकजुट और समावेशी बांग्लादेश के निर्माण का आह्वान करते हुए पत्र का समापन किया। मुझे घर पर बुलाने के लिए धन्यवाद। अल्लाह बांग्लादेश और आप सभी को, अब और हमेशा आशीर्वाद दे।
पत्नी-बेटी के साथ देश लौटे रहमान
तारिक रहमान गुरुवार को ढाका लौटे, जहां उनकी पार्टी के हजारों समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। वह अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी जाइमा के साथ ढाका पहुंचे। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने 12 फरवरी को चुनावों की घोषणा की है, जिसके बाद वह चुनी हुई सरकार को कुर्सी सौंप देगें। रहमान की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, 23 नवंबर से गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में रहमान को बीएनपी की बागडोर संभालने की अहम कड़ी माना जा रहा है। उनके आने से जमात ए इस्लामी की भी मुश्किलें बढ़ गई है। जो बांग्लादेश को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का सपना देखती है।