भारत ने अमेरिका के ऑटो और ऑटो पार्ट्स पर लगाए 25% टैरिफ को डब्ल्यूटीओ में सेफगार्ड उपाय बताते हुए बातचीत की मांग की थी। लेकिन इसपर अमेरिका ने कहा कि ये टैरिफ सेफगार्ड के तहत नहीं हैं, इसलिए भारत की अपील बेबुनियाद है। हालांकि, वह इस मुद्दे पर बातचीत को तैयार है लेकिन बिना नियमों की मान्यता के।
अमेरिका ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) को बताया है कि उसके द्वारा ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर लगाए गए टैरिफ सेफगार्ड (रक्षा उपाय) नहीं हैं, इसलिए भारत की इस पर आपत्ति और डब्ल्यू में बातचीत की मांग का कोई आधार नहीं है।
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हाल ही में भारत ने डब्ल्यूटीओ के सेफगार्ड एग्रीमेंट के तहत अमेरिका से बातचीत की मांग की थी। भारत का कहना है कि अमेरिका ने 25% टैरिफ बढ़ाकर ऑटो और ऑटो पार्ट्स के आयात पर जो रोक लगाई है, वह सेफगार्ड उपाय के तहत आती है।
अमेरिका में डब्ल्यूटीओ में दी अपनी सफाई
मामले में अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ को दिए बयान में कहा कि हमने ये टैरिफ जीएटीटी 1994 या सेफगार्ड एग्रीमेंट के तहत नहीं लगाए हैं। इसलिए भारत की बातचीत की मांग इन नियमों के तहत मान्य नहीं है। हालांकि अमेरिका ने कहा कि वह भारत से इस मुद्दे पर बातचीत को तैयार है, लेकिन यह सेफगार्ड एग्रीमेंट के तहत नहीं होगी और इससे अमेरिका के रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत की हिस्सेदारी कम, लेकिन असर बड़ा
अमेरिका ने पिछले साल करीब 89 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स का आयात किया, जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सा मैक्सिको (36 अरब डॉलर), फिर चीन (10.1 अरब डॉलर) और भारत (2.2 अरब डॉलर) का था। भले ही भारत का हिस्सा कम है, लेकिन भारत को लगता है कि यह कदम उसकी ऑटो इंडस्ट्री पर गलत असर डालेगा।
बता दें कि अमेरिका ने यह टैरिफ 26 मार्च 2025 को लागू किया था, जबकि ऑटो पार्ट्स पर यह टैरिफ 3 मई 2025 से लागू हुआ है और इसकी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। हालांकि भारत ने पहले ही अमेरिका की स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ बढ़ाने के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने का अधिकार डब्ल्यूटीओ में सुरक्षित कर चुका है।