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ईरानी तेल ले जा रहा था टैंकर: अटलांटिक में अमेरिका ने सात हफ्ते तक किया पीछा, अब जहाज के कप्तान ने कबूला जुर्म

Sat, 13 Jun 2026 11:11 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

प्रतिबंधित ईरानी तेल ले जाने के आरोप में बेला-1 टैंकर के पूर्व कप्तान अवतांदिल कालांदाद्जे ने अमेरिकी अदालत में जुर्म कबूल कर लिया है। अमेरिका का आरोप है कि जहाज ने तटरक्षक बल के आदेशों की अवहेलना की और कई सप्ताह तक अटलांटिक महासागर में पीछा चलता रहा। मामला ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों और तथाकथित शैडो फ्लीट के खिलाफ चल रही कार्रवाई से जुड़ा है।
 
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कबूलनामे की कहानी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। अटलांटिक महासागर में कई सप्ताह तक चले पीछा और समुद्री कार्रवाई के बाद एक तेल टैंकर के कप्तान ने अमेरिकी अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। अमेरिका का आरोप है कि जहाज प्रतिबंधित ईरानी तेल लेकर जा रहा था और उसे रोकने के आदेश का पालन नहीं किया गया। इस मामले को अमेरिका की उस व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत वह प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक व्यापार पर शिकंजा कस रहा है।
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अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार जॉर्जिया के नागरिक और तेल टैंकर बेला-1 के पूर्व कप्तान अवतांदिल कालांदाद्जे ने संघीय अदालत में दोष स्वीकार कर लिया है। उन पर अमेरिकी तटरक्षक बल के जहाज को रोकने के आदेश की अवहेलना करने का आरोप था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि दिसंबर 2025 में जब अमेरिकी तटरक्षक बल ने टैंकर को रोकने की कोशिश की, तब जहाज ने आदेश मानने के बजाय भागने की कोशिश की और अटलांटिक महासागर में कई सप्ताह तक पीछा चलता रहा। अंततः सात जनवरी को जहाज को जब्त कर लिया गया।

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क्या था प्रतिबंधित तेल के परिवहन का आरोप?

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि बेला-1 ने सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच करीब 18 लाख बैरल ईरानी मूल का तेल एशियाई बाजारों तक पहुंचाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार जहाज की गतिविधियों को छिपाने के लिए कई तरीके अपनाए गए। इनमें ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद रखना और समुद्र में तेल के हस्तांतरण के दौरान जहाज की पहचान छिपाना शामिल था। अमेरिका का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क प्रतिबंधों से बचने के लिए संचालित किया जा रहा था।

अटलांटिक महासागर में पीछा क्यों चला?

अमेरिकी तटरक्षक बल के अनुसार दिसंबर 2025 में बेला-1 वेनेजुएला की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान उसे रोकने का आदेश दिया गया, लेकिन जहाज ने आदेश नहीं माना। इसके बाद अमेरिकी तटरक्षक बल के पोत मुनरो ने उसका पीछा शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि कप्तान ने कई बार चेतावनी मिलने के बावजूद जहाज नहीं रोका। इससे समुद्र में जोखिमपूर्ण स्थिति पैदा हुई और अमेरिकी बलों को कठिन परिस्थितियों में कार्रवाई करनी पड़ी।

कप्तान पर और क्या आरोप लगाए गए?

अभियोजकों के अनुसार कप्तान ने जहाज संचालक कंपनी के प्रतिनिधियों के निर्देश पर अमेरिकी एजेंसियों से बचने की कोशिश की। आरोप है कि उसने जहाज पर मौजूद कुछ रिकॉर्ड और जानकारियां भी नष्ट कीं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से तटरक्षक बल के जवानों और नौसैनिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि जहाज ने प्रतिबंधित तेल के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।
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अमेरिकी अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने की तारीख सात अगस्त तय की है। इस अपराध में अधिकतम पांच वर्ष की जेल की सजा हो सकती है। न्याय विभाग ने कहा है कि यदि अदालत सजा सुनाती है तो जेल की अवधि पूरी होने के बाद कप्तान को अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह तथाकथित शैडो फ्लीट यानी उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधित तेल के परिवहन के लिए किया जाता है।
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