अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बीच वार्ता एक बार फिर शुरू होने जा रही है। इसे लेकर ईरान ने कहा है कि यह वार्ता तकनीकी और जटिल होगी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह बयान उस वक्त दिया जब परमाणु निगरानी संस्था तेहरान का दौरा करने वाली है। जून में इस्राइल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से संबंध तोड़ लिए थे।
सोमवार को ईरान के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने बताया कि आईएईए के उप महानिदेशक और सुरक्षा प्रमुख मास्सिमो अपारो ईरान छोड़ चुके हैं। अपारो ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें विदेश मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा संगठन के अधिकारी शामिल थे, ताकि एजेंसी और ईरान के बीच बातचीत के तरीके पर चर्चा की जा सके। गरीबाबादी ने कहा कि उन्होंने भविष्य में भी परामर्श जारी रखने का निर्णय लिया है, हालांकि उन्होंने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि आईएईए की विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बैठक हो सकती है, लेकिन यह तकनीकी और जटिल वार्ता है। बाघेई ने जून में इस्राइल के साथ हुए युद्ध के दौरान IAEA की स्थिति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि 24 घंटे निगरानी में रहने वाले देश के शांतिपूर्ण प्रतिष्ठानों को हमलों का निशाना बनाया गया और एजेंसी ने बुद्धिमत्तापूर्ण और तर्कसंगत प्रतिक्रिया दिखाने से परहेज किया तथा इसकी निंदा भी नहीं की।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा था कि एजेंसी के साथ सहयोग के लिए अब ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी जरूरी होगी। दोनों पक्षों के सहयोग के तरीके को नए सिरे से परिभाषित करने के बारे में होगा। इस फैसले के बाद एजेंसी की तेहरान के उस कार्यक्रम पर नजर रखने की क्षमता और सीमित हो जाएगी, जो हथियार-स्तर के क़रीब यूरेनियम संवर्धन कर रहा था।
राष्ट्रपति ने तोड़ दिए थे आईएईए से संबंध
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तीन जुलाई को देश को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग निलंबित करने का आदेश दिया। ईरान ने कहा था कि उसके परमाणु स्थलों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं। यह कार्रवाई दुर्भाग्य से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की उदासीनता और मिलीभगत के तहत हुई। अमेरिकी दुश्मन ने हमलों की जिम्मेदारी ली है, जो सुरक्षा समझौते और एनपीटी के अनुसार निरंतर आईएईए निगरानी के अधीन हैं। यह उम्मीद की जाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जंगलराज जैसी इस अराजकता की निंदा करेगा और ईरान को उसके वैध अधिकारों का दावा करने में समर्थन देगा।
आईएईए ने दी थी चेतावनी
वहीं इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बावजूद, तेहरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ग्रॉसी का कहना है कि ईरान महज कुछ महीनों में फिर से यूरेनियम संवर्धन शुरू कर सकता है।