रूस की ओर से मिले इनाम के लालच में अफगानिस्तान के आतंकियों ने अमेरिकी सैनिकों की हत्या का प्रस्ताव स्वीकार करने की खुफिया जानकारी मिलने के बावजूद अमेरिका-तालिबान समझौता बेपटरी नहीं हुआ है। हालांकि इस खुलासे ने इस समझौते के आलोचकों को यह कहने की एक और वजह दे दी है कि तालिबान बिल्कुल भी भरोसे लायक नहीं है।
अमेरिकी सीनेटर माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि तालिबान ने समझौता होने से पहले और बाद में यह बार-बार दिखाया है कि वह इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया मामलों के विशेषज्ञ स्कॉट स्मिथ ने कहा कि केवल इनाम की बात नहीं है, हम इसे इस तरह देखते हैं कि तालिबान समझौते का सम्मान करेगा या नहीं।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों ही दलों के सांसदों, रक्षा अधिकारियों और अफगानिस्तान विशेषज्ञों ने यह दावा किया है कि तालिबान ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जिससे यह पता चलता हो कि वह चार महीने पुराने समझौते का पालन कर रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि तालिबान 9/11 हमलों के लिए जिम्मेदार अल-कायदा के साथ शायद ही कभी संबंध तोड़ेगा।