तालिबान ने चीन को बताया है कि अशांत शिनजियांग प्रांत के ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) से जुड़े आतंकी अफगानिस्तान छोड़कर चले गए हैं। ईटीआईएम वही संगठन है, जो चीनी प्रांत शिनजियांग की आजादी के लिए मुहिम चला रहा था और इसका संबंध अफगानिस्तान से भी रहा है। शिनजियांग की सीमा अफगानिस्तान से मिलती है। बता दें कि काबुल पर तालिबान का कब्जा होने के बाद से ही चीन ने उसके ऊपर इस बात के लिए दबाव बना रखा था।
ईटीआईएम के अफगानिस्तान छोड़ने के पीछे वजह तालिबान का कड़ा रुख बताया जा रहा है। तालिबान ने स्पष्ट कर दिया था कि वह अफगान धरती का इस्तेमाल किसी भी अन्य देश पर आतंकी हमले के लिए नहीं करने देगा। इन देशों में अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों का नाम भी शामिल है। तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स को यह जानकारी दी।
बता दें कि अमेरिका और यूरोपीय संघ चीन के ऊपर हमेशा आरोप लगाते रहते हैं। उनका कहना है कि चीन उइगर मुसलमानों को डिटेंशन कैंप में रखकर उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करता रहता है। जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार थी, तब यूएस ने ईटीआईएम से प्रतिबंध हटा लिए थे। चीन ने इसे आतंकवाद से लड़ाई में चीन का दोहरा रवैया बताया था। हालांकि शाहीन ने इस बात का कोई जबाव नहीं दिया कि अगर चीन ईटीआईएम मेंबर्स को उसके हवाले कहने के लिए कहता है तो तालिबान का रुख क्या होगा?
तालिबान प्रवक्ता शाहीन ने कहा कि ईटीआईएम सदस्यों को दिए संदेश के बाद उन लोगों का अफगानिस्तान में रहना मुश्किल हो जाएगा, जो हमारी धरती से अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में रक्षा मंत्रालय, आंतरिक मंत्रालय और खुफिया विभाग मिलकर देश में आतंक विरोधी अभियान चलाएंगे। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सभी मिलकर सुनिश्चित करेंगे कि अफगानिस्तान में कोई ऐसी ताकत न पनपने पाए जो किसी अन्य देश के खिलाफ आतंकी अभियान चलाना चाहती हो।
शाहीन ने कहा कि उनकी अपनी क्षमता है, अनुभव है और जरूरी हथियार भी हैं। इनके दम पर इस तरह के सुरक्षा हालात से जूझने में आसानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी देश की ऐसी कोई चिंता है तो वह डिप्लोमेटिक मीटिंग्स के जरिए हमें बता सकता है। शाहीन ने कहा कि तालिबान सरकार आतंक को अपनी जड़ों से खत्म करना चाहती है। अब हमारा मकसद देश के विकास पर ध्यान देना है। हम अपने लोगों को एक शांतिपूर्ण जिंदगी देना चाहते हैं।