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Afghanistan: तालिबान ने नागरिक कानूनों को इस्लामी कानूनों में बदला, पूरे देश में 'शुद्धिकरण' अभियान शुरू

Mon, 20 Feb 2023 02:38 AM IST
देव कश्यप एएनआई, कंधार।

सार

सुसन्नाह जॉर्ज ने वाशिंगटन पोस्ट में अपनी एक लेख में कहा है कि अफगानिस्तान पर नियंत्रण के डेढ़ साल बाद तालिबान ने संविधान को खत्म करके और कानूनी कोड को इस्लामिक कानून की कठोर व्याख्या के आधार पर नियमों के साथ बदलकर देश की न्याय प्रणाली को खत्म कर दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : ANI
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विस्तार
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अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद कई बदलाव किए गए हैं। सुसन्नाह जॉर्ज ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा है कि अफगानिस्तान के नए शासक तालिबान ने नागरिक कानूनों को इस्लामिक कानूनों से बदलने के लिए देश भर में "शुद्धिकरण" अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया तो समूह ने एक "शुद्धिकरण" अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य देश में पूरी तरह से इस्लामी समाज बनाने के लिए नागरिक कानूनों और संस्थानों को अलग करना था।

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जार्ज ने कहा कि डेढ़ साल बाद तालिबान ने संविधान को खत्म करके और कानूनी कोड को इस्लामिक कानून की कठोर व्याख्या के आधार पर नियमों के साथ बदलकर देश की न्याय प्रणाली को खत्म कर दिया है। तालिबान ने जेलों को भर दिया है। साथ ही पुरुषों और महिलाओं को बुनियादी नागरिक अधिकारों से वंचित कर दिया है और सबसे कमजोर अफगानों की रक्षा के लिए बनाई गई सामाजिक सुरक्षा जाल को नष्ट कर दिया है।

द वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि तालिबान मीडिया को बदलने की भी मांग कर रहा है। मीडिया का उपयोग देश के लिए अपने विजन को बढ़ावा देने और संगीत और संस्थानों में महिलाओं की उपस्थिति सहित गैर-इस्लामिक समझी जाने वाली सामग्री को प्रतिबंधित करने के लिए किया जा रहा है।
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वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों का कहना है कि इस प्रयास ने अधिकारों पर आधारित एक सामाजिक व्यवस्था को भय और डराने-धमकाने की प्रक्रिया में बदल दिया है। हालांकि, तालिबान के अधिकारियों और कुछ अफगानों ने इस अभियान को सुरक्षा में सुधार और भ्रष्टाचार को खत्म करने का श्रेय दिया है। अफगानिस्तान के दूसरे शहर कंधार में अपनी मस्जिद के बाहर तालिबान से करीबी संबंध रखने वाले एक प्रमुख इमाम मावलेवी अहमद शाह फेडायी ने कहा कि हमने देश में मानवता लौटाई है।

तालिबान के न्यायाधीशों ने कहा कि उन्होंने 2021 के अधिग्रहण के बाद परित्यक्त अदालतों में स्थानांतरित होने पर पिछली सरकार के कानूनों वाली पुस्तकों को जला दिया गया। जॉर्ज ने कहा कि हाल के महीनों में तालिबान द्वारा इन कानूनी और नीतिगत परिवर्तनों को औपचारिक रूप देने के साथ, शुद्धिकरण अभियान और आगे बढ़ गया है। इसके अलावा, तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा कथित अपराधियों को इस्लामिक कानून के अधीन करने के बारे में अधिक मुखर हो गए हैं। उदाहरण के लिए, किसी अपराध के लिए सजा अब सार्वजनिक रूप से पिटाई में तब्दील हो गया है।

तालिबान के उप प्रवक्ता कारी मुहम्मद यूसेफ अहमदी ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि तालिबान शासकों को इस्लामी शरीयत व्यवस्था बनाने और अफगान समाज में सुधार लाने के प्रयास करने के लिए मजबूर किया गया है। उन्होंने इस्लामी कानून की तालिबान की व्याख्या को थोपते हुए कहा कि यह सरकार और जनता के लिए एक आशीर्वाद है। साथ ही यह अल्लाह को प्रसन्न करता है।

जॉर्ज ने कहा, अब तक तालिबान के शुद्धिकरण अभियान ने समूह के पहले के कार्यकाल की क्रूरता जैसे कि कथित व्यभिचार के लिए महिलाओं को व्यापक रूप से पत्थरों से मारने जैसी घटना को फिर से प्रकट नहीं किया है। लेकिन हाल के बदलावों से पता चलता है कि तालिबान उस दिशा में आगे बढ़ सकता है। गौरतलब है कि सत्ता संभालने के बाद तालिबान ने शिक्षा तक महिलाओं की पहुंच को गंभीर रूप से प्रतिबंधित कर दिया है और महिलाओं को मानवीय संगठनों के लिए काम करने से रोक दिया है।

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