तालिबान के मीडिया प्रमुख तारिक गजनीवाल
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तालिबान मानता है कि भारत उसका पड़ोसी तो नहीं, लेकिन एक अहम नजदीकी देश है। ऐसे में तालिबान सरकार ने भारत से बातचीत के सभी रास्ते खोल रखे हैं। अफगानिस्तान में पूर्ण सरकार बनने के बाद तालिबानी सत्ता भारत से न सिर्फ संपर्क करेगी, बल्कि दोनों मुल्कों के वर्षों पुराने रिश्तों को बरकरार रखने के लिए द्विपक्षीय वार्ता भी करेगी। यह जानकारी तालिबानी सरकार के मीडिया प्रमुख तारिक गजनीवाल ने अमर उजाला डॉट कॉम से हुई लंबी बातचीत में दी।
उन्होंने कहा कि तकरीबन ढाई दशक बाद सत्ता में वापस आई तालिबानी सरकार पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और पूर्व सीईओ अब्दुल्ला अब्दुल्ला समेत पूर्ववर्ती सरकार के उन तमाम लोगों से बातचीत कर रही है, जो अफगानिस्तान में हैं। उनके तजुर्बे का फायदा मुल्क की तरक्की में लिया जाएगा। इसके अलावा अन्य लोगों को भी सरकार में साझेदारी का मौका दिया जाएगा।
तालिबानी प्रवक्ता ने बताया कि उनके जितने कमांडरों को अमेरिका ने आतंकवादी घोषित करके इनाम रखा, उनको भी उस सूची से बाहर निकलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, पूरी बातचीत के दौरान कश्मीर मुद्दे को लेकर पूछे गए सवाल पर तालिबान प्रवक्ता का रुख बहुत स्पष्ट नहीं रहा।
सवाल: 15 अगस्त को अफगानिस्तान में तख्ता पलट करके करीब ढाई दशक बाद एक बार फिर से तालिबानी सत्ता पर काबिज हो गए। इसे पूरी दुनिया में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है। लोग डरे हुए हैं। देश छोड़ रहे हैं। तालिबानी बदले नहीं हैं क्या अब तक?
जवाब: जी, ऐसा नहीं है। आप देखिए अफगानिस्तान में पूरी तरह अमन है। लोग हमको पसंद कर रहे हैं। रही बात क्राइम की तो वह दुनिया के हर देश में होता है।
सवाल: जैसे ही तालिबानियों ने सत्ता पर कब्जा किया, अफगानिस्तान से डरावनी तस्वीरें आने लगीं। लोग हवाई जहाज के पहियों पर बैठकर देश छोड़ने लगे और मौतें होने लगीं। लोगों का तालिबान में भरोसा नहीं है। अफगानिस्तान के लोग हकीकत में बहुत डरे हुए हैं।
जवाब: जो लोग शुरुआती दौर में देश छोड़कर भाग रहे थे, वे या तो जासूस थे या दूसरे मुल्कों के लिए काम करने वाले लोग थे। अफगानिस्तान में तो लोग अमन पसंद करते हैं। आप बताइए कि क्या अब कोई भी व्यक्ति या देश का नागरिक अफगानिस्तान छोड़ कर जा रहा है? कोई भी नहीं जा रहा है, बल्कि लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं।
सवाल: कैसे लोग आप से जुड़े हुए हैं? आपके ही देश की मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि तालिबान के लड़ाके लोगों, पत्रकारों और महिलाओं से बर्बरतापूर्वक मारपीट कर रहे हैं। लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। अफगानिस्तान की सड़कों पर तो मानवाधिकार दिख ही नहीं रहा है और आप बता रहे हैं कि लोगों का भरोसा आप पर बढ़ा है?
जवाब: नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप जिस वीडियो की बात कर रहे हैं, उस वीडियो की सत्यता ही नहीं पता कि वह आखिर है कब का। रही बात मारपीट की तो इसके लिए तालिबानी सरकार ने पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं। हमारी सरकार इस मामले में पूरी पड़ताल करेगी कि पत्रकारों और महिलाओं के साथ मारपीट कौन कर रहा है?
सवाल: सत्ता पर काबिज हुए तकरीबन एक महीना हो गया है और सरकार बने भी वक्त हो गया है। भारत को लेकर तालिबान का क्या रुख है?
जवाब: भारत हमारा एकदम पड़ोसी मुल्क तो नहीं है, लेकिन अहम नजदीकी देश है। भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते हमेशा से बहुत अच्छे रहे हैं। हमारी सरकार इसे आगे बढ़ाना चाहेगी। जैसे ही अंतरिम सरकार पूर्ण रूप से बनकर आएगी तो हमारे विदेश मंत्री समेत जिम्मेदार लोग भारत सरकार से न सिर्फ बातचीत करेंगे, बल्कि हर संभव रास्ते अख्तियार करेंगे, जिससे दोनों मुल्कों के रिश्ते बेहतर बने रहे। हम चाहते हैं कि हमारे रिश्ते दुनियाभर से बेहतर हों, ताकि अफगानिस्तान में अमन और चैन कायम रहे।
सवाल: आप यह सब कैसे कर पाएंगे, क्योंकि अफगानिस्तान में तो पाकिस्तान का बहुत दखल है? पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ काबुल में बैठकर आपकी सरकार बनाते हैं। तालिबान तो वही करेगा जो पाकिस्तान कहेगा। ...और पाकिस्तान भारत में हमेशा से आतंकवाद को बढ़ावा देता है।
जवाब: नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। अफगानिस्तान की जमीन किसी भी देश के लिए इस्तेमाल होने वाली नहीं है। अगर कोई मुल्क इस गलतफहमी में है तो उसको इस बात का पूरी तरह ध्यान रखना चाहिए कि अफगानिस्तान की छवि आतंकवाद के लिहाज से खराब नहीं होने दी जाएगी। अब रही बात आईएसआई चीफ के काबुल आने की तो ऐसा पहली बार नहीं हुआ। पाकिस्तान के लोगों का अफगानिस्तान आना-जाना रहता है। यह जिम्मेदारी हमारी और हमारी सरकार की है कि हमारी जमीन का कोई नाजायज इस्तेमाल न करे।
सवाल: पंजशीर में पाकिस्तानी सेना ने जिस तरह आपका साथ दिया, उससे आप कैसे साबित कर पाएंगे कि पाकिस्तान आप पर हुकूमत नहीं चला रहा?
जवाब: यह सरासर झूठ है। मीडिया का फैलाया प्रोपेगेंडा है कि पाकिस्तान ने तालिबानी सरकार की मदद की। ऐसा बिल्कुल नहीं है। जो वीडियो मीडिया में आया, वो बाद में एक वीडियो गेम की फुटेज साबित हुआ, जिसे प्रोपेगेंडा के तहत चलाया गया।
सवाल: तालिबानी सत्ता आने के बाद आपकी ही सरकार और आपके कमांडर कश्मीर को लेकर आग उगलने जैसी बातचीत करने लगे। पाकिस्तान तो हमेशा से ही कश्मीर में आतंकवाद को प्रायोजित करके अमन शांति तबाह करता रहा है। ऐसे में कश्मीर को लेकर तालिबानी सरकार का क्या रुख है?
जवाब: हम पहले भी कह चुके हैं कि अफगानिस्तान की जमीन को किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल होने की इजाजत नहीं मिलेगी। हमारी सरकार दुनिया के तमाम देशों के साथ अच्छे रिश्ते बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। एक बात जरूर है कि जब कहीं कोई बड़ी घटना होती है तो उसके विरोध में आवाज है। ऐसी आवाजें सिर्फ अफगानिस्तान में ही नहीं, बल्कि दुनिया के सभी देशों में उठती हैं।
सवाल: आप कह रहे हैं कि अफगानिस्तान की जमीन को किसी भी तरह से आतंकवादियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे, जबकि हकीकत यह है कि अफगानिस्तान में ही अलकायदा और आईएस खोरासन जैसे तमाम आतंकी संगठन अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं?
जवाब: बॉर्डर इलाके में जरूर ऐसी चीजें हो सकती हैं, लेकिन अफगानिस्तान की पूरी जमीन पर ऐसा कुछ भी नहीं है। हमारे पास अगर ऐसी जानकारियां आ रही हैं तो हमारी सेना और कमांडर लगातार उन कैंप को नेस्तनाबूद कर रहे हैं।
सवाल: एक अहम सवाल है। पंजशीर पर आपका कब्जा है या नॉर्दर्न रेजिस्टेंट फ्रंट का। रेजिस्टेंट फ्रंट कह रहा है कि हम बहुत जल्द वहां पर भी सरकार बना लेंगे, जबकि आप अपने कब्जे का दावा कर रहे हैं। सच क्या है?
जवाब: हमारे कमांडरों ने पूरी तरह से पंजशीर पर कब्जा कर लिया है। रेजिस्टेंट फोर्स के लोग गलत बयानी कर रहे हैं।
सवाल: आपने बॉर्डर इलाकों की बात की तो एक अहम सवाल सामने आता है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा मानी जाने वाली डूरंड लाइन को लेकर तालिबान सरकार का क्या रुख है?
जवाब: यह सब सरकार को तय करना है। उसे इस पर अपनी नीति बनानी है। मैं लगातार कह रहा हूं कि हमारी अंतरिम सरकार है। जैसे ही पूर्ण रूप से सरकार बनेगी, हम लोग बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के मामलों को न सिर्फ देखेंगे, बल्कि उनको आगे भी बढ़ाएंगे।
सवाल: महिलाओं को लेकर तालिबानियों की सख्ती हमेशा की तरह बरकरार है। आप की सरकार में महिलाओं की भागीदारी तो जीरो है। इसके अलावा आपकी सरकार खेलकूद और कला एवं संस्कृति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर क्या सोचती है?
जवाब: आप देखना तालिबानियों की सरकार बदली हुई नजर आएगी। जैसे ही हमारी अंतरिम सरकार पूर्ण रूप की सरकार में तब्दील होगी तो महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। रही बात स्पोर्ट्स की तो आप देख ही रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया में होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए अफगानिस्तान की टीम का चयन हो चुका है। फुटबॉल में भी हमारे खिलाड़ी आगे बढ़ रहे हैं। आर्ट और कल्चर तो हर देश का अलग-अलग होता है और वह मुल्क से जुदा नहीं हो सकता। उसको वहां के रीति-रिवाजों के मुताबिक ही आगे बढ़ाया जाता है।
सवाल: दो दिन पहले कतर के विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान में दौरा किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला से भी मुलाकात की। तालिबान क्या डिप्लोमेटिकली आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है?
जवाब: सिर्फ कतर ही नहीं, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी भी इस वक्त काबुल में हैं। कई और देशों के राष्ट्राध्यक्ष से लेकर विदेश मंत्री काबुल का दौरा करने वाले हैं। दरअसल, तालिबान को लेकर एक विशेष तरह की इमेज बनाने का प्रोपेगेंडा मीडिया का है। अन्यथा आप देखेंगे कि तालिबान की मदद के लिए अब दुनिया के कई मुल्क न सिर्फ आगे आ रहे हैं, बल्कि रिश्ते भी जोड़ रहे हैं। हमारी सरकार की भी यही कोशिश है कि पूरी दुनिया में बेहतर रिश्ते और संवाद बना रहे। रही बात हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला को लेकर तो तालिबान की पूर्ण सरकार बनते ही कई राजनीति डिवेलपमेंट होंगे। ऐसे में हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला से बातचीत हो रही है। उनके अलावा तमाम अनुभवी नेताओं के तजुर्बे का फायदा मुल्क की बेहतरी के लिए उठाया जाएगा। उन्हें भी हिस्सेदारी दी जाएगी।
सवाल: तालिबान की जो सरकार बनी है, उसमें हक्कानी नेटवर्क के टॉप कमांडर समेत कई ऐसे लोग भी हैं, जो अमेरिका के आतंकवादियों की हिट लिस्ट में हैं। इससे स्पष्ट है कि तालिबानी न पहले बदले थे, न अब बदले हैं।
जवाब: अमेरिका ने हमारे कई कमांडरों को आतंकवादियों की लिस्ट में शामिल कर रखा है। ये सभी नाम बहुत पहले से हैं। जिन लोगों की आप बात कर रहे हैं, वे सब हमारे कमांडर हैं और अफगानिस्तान में आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे। इन सभी सूचीबद्ध कमांडरों के नाम आतंकवादी के तौर पर हटवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए अमेरिका से संपर्क भी किया जा चुका है। उम्मीद है बहुत जल्द सभी लोगों का नाम इस लिस्ट से बाहर हो जाएगा।