तालिबान का सर्वोच्च नेता हिबतुल्ला अखुंदजादा
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बीते साल अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की वापसी के बाद से वहां महिलाओं की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। सत्ता पर काबिज होने के बाद से तालिबान सरकार महिलाओं पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लगाता रहा है। शनिवार को आई खबर के मुताबिक, तालिबान प्रमुख हिबतुल्ला अखुंदजादा ने अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से महिलाओं को बुर्का पहनने का फरमान सुनाया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, तालिबान प्रमुख अखुंदजादा ने ये फरमान जारी किया था। इसके बाद शनिवार को काबुल में एक कार्यक्रम के दौरान तालिबानी अधिकारियों ने इसे जारी किया। अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं को चादोरी यानी सिर से पैर तक बुर्का पहनना चाहिए। तालिबानी अधिकारियों के मुताबिक, ये परंपरागत और सम्मानजनक है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाए गए सबसे कठोर प्रतिबंधों में से एक है। इससे पहले अफगानिस्तान में तालिबान ने पोस्टर चिपका कर महिलाओं को घरों में रहने का आदेश दिया था। इतना ही नहीं तालिबान पहले ही महिलाओं पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। महिलाओं द्वारा ड्राइविंग पर लगाई गई रोक, इनमें से एक है। इतना ही नहीं, पिछले साल दिसंबर में तालिबान ने एक और निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि सड़क मार्ग से लंबी दूरी की यात्रा के समय महिलाओं को केवल एक पुरुष रिश्तेदार के साथ यात्रा करनी चाहिए।
तालिबान ने 1990 के दशक में अपने शासन काल में अफगानिस्तान में महिलाओं को बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया था। हालांकि काबुल में महिलाएं पहले से ही अपने सर को स्कार्फ से ढकती थीं। हालांकि अफगानिस्तान के सत्ता से हटने के बाद भी बड़ी संख्या में महिलाएं बुर्का पहनती रहीं। अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद उसने कहा था कि वह अब महिलाओं को उनके सीमित अधिकार देगा, लेकिन अगस्त 2021 के बाद इतना समय बीत जाने के बाद भी ये स्थिति बदलती नहीं दिखती।
गुटेरेस ने जताई चिंंता
इस बीच संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने तालिबान द्वारा अफगान महिलाओं को सिर से पैर तक ढकने के लिए बाध्य करने के एक हालिया फैसले पर चिंता जताई। गुटेरेस ने रविवार को ट्वीट किया कि मैं तालिबान द्वारा हाल ही की घोषणा से चिंतित हूं कि महिलाओं को सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा ढंकना चाहिए और केवल आवश्यकता के मामलों में ही घर छोड़ना चाहिए। मैं एक बार फिर तालिबान से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत अफगान महिलाओं और लड़कियों से अपने वादे और उनके दायित्वों को निभाने का आग्रह करता हूं।