अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद कई राजनीतिक नेता देश छोड़कर वापस चले गए थे। इन नेताओं की वापसी के लिए तालिबान ने आयोग बनाया है। इस आयोग में सात सदस्य रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के हवाले से कहा जा रहा है कि सात सदस्यीय इस आयोग का नेतृत्व कार्यवाहक गैस और पेट्रोलियम मंत्री कर रहे हैं। तालिबान द्वारा बनाए गए इस आयोग का काम अफगान नेताओं से संपर्क करके उनके प्रत्यावर्तन का मार्ग प्रशस्त कराना है।
कैबिनेट के निर्णय के आधार पर कार्यवाहक गैस और पेट्रोलियम मंत्री शुहाबुद्दीन डेलावर आयोग का नेतृत्व करेंगे। साथ ही उनके अलावा इस आयोग में कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी, सूचना और संस्कृति के कार्यवाहक मंत्री खैरुल्ला खैरख्वा, इस्लामिक अमीरात के एक वरिष्ठ सदस्य फसीहुद्दीन फेरात, मोहम्मद खालिद हनफी और अनस हक्कानी शामिल हैं। इसकी जानकारी राष्ट्रपति के प्रशासनिक कार्यालय ने अपने बयान में दी है।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा राष्ट्रपति अशरफ गनी से सत्ता हथियाने के बाद कई राजनीतिकों नेताओं सहित अफगानों ने देश छोड़ दिया था। पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से वहां मानवाधिकारों की स्थिति बदहाल हो गई है।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां हुए विभिन्न हमलों में लगभग 400 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 80 फीसदी नागरिकों की मौत इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों द्वारा किए गए हमलों में हुई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ये साफ हो गया था कि तालिबान राज में अफगानिस्तान में चरमपंथ किस हद तक बढ़ गया है।
अफगानिस्तान में हो रहे मानवाधिकारों का आलम यह है कि यहां तालिबानी न्याय को लेकर फांसी, जबरन अपहरण करना, यातना, महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों का सेंसरशिप और मीडिया के खिलाफ जमकर हमले किए जा रहे हैं।