तालिबान ने मई के बाद से अफगानिस्तान में कई बड़े शहरों पर दोबारा कब्जा कर लिया है। अमेरिकी सेना की देश से वापसी की घोषणा के बाद से तालिबान ने आतंक बढ़ाते हुए अफगानिस्तान की 370 में से 50 जिलों पर कब्जा कर लिया है। पिछले कुछ दिनों में बड़े सैन्य अभियान चलाते हुए तालिबान देश के कई प्रांतों की राजधानियों के करीब पहुंच चुका है।
यह जानकारी अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत डेबोरा लियोन्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को दी है। अमेरिका व अफगानिस्तान के राष्ट्रपतियों की मुलाकात से पूर्व उन्होंने परिषद को बताया कि इस साल की शुरुआत में विदेशी सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा के बाद से ही अफगानिस्तान में तबाही शुरू हो गई है।
लियोन्स के मुताबिक, जिन जिलों को प्रांतीय राजधानियों से तालिबान को खदेड़ा गया था, उन्हें वह दोबारा वापस लेने की कोशिश में जुटा है। वह सिर्फ विदेशी सेना के पूरी तरह से वापस होने के इंतजार में है।
उसने यह चेतावनी भी दी है कि है इससे हाल के दिनों में शांति स्थापना को लेकर हुई राजनीतिक प्रगति और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पारंपरिक गढ़ से काफी बाहर आया तालिबान
अफगान अधिकारियों ने जानकारी दी है कि उत्तरी हिस्से में तालिबान तेजी से आगे बढ़ रहा है और अपने पारंपरिक गढ़ से काफी बाहर निकल आया है। तालिबान लड़ाकों ने मंगलवार को शीर खान बंदर पर कब्जा कर लिया, जो ताजिकिस्तान के साथ लगती सीमा पर अफगानिस्तान का एक अहम शहर है।
इससे पहले वे उत्तरी प्रांत बगलान के नाहरीन और बगलान-ए-मरकजी जिलों को भी कब्जा चुके हैं। डेबोरा लियोन्स ने बताया कि तालिबान के कब्जाए जिले प्रांतों की राजधानियों के इर्द गिर्द हैं जो संकेत देते हैं कि तालिबान रणनीतिक तरह से आगे बढ़ रहा है।
11 सितंबर तक बाहर होंगे विदेशी सैनिक
अफगानिस्तान में 20 सालों तक चले युद्ध के बाद अब अमेरिका ने अपने सैनिक वापस बुलाने शुरू कर दिए हैं, जो 11 सितंबर तक देश से पूरी तरह से बाहर हो जाएंगे। वहीं नाटो देशों के लगभग सात हजार गैर-अमेरिकी कर्मचारी, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जॉर्जिया के लोग शामिल हैं। वह भी तय तारीख तक अफगानिस्तान से बाहर जाने की योजना बना रहे हैं।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा है कि अमेरिकी सैनिकों को वापस लेने के फैसला बहुत विचार-विमर्श करने के बाद लिया गया है और अमेरिका अफगान के सुरक्षा बलों का समर्थन करना जारी रखेगा।