ताइवान की चिप निर्माता कंपनियों ने अब अपने यहां ही सेमीकंडक्टर उपकरण बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए उन्होंने पिछले तीन दिसंबर को एक करार पर दस्तखत किए। इस खबर का विश्लेषण करते हुए एक अमेरिकी रिसर्च फर्म ने कहा है कि ताइवान की कंपनियों का ये कदम अमेरिका से रिश्ता तोड़ने की दिशा में जा सकता है। इन कंपनियों को चीन को ध्यान में रख कर लगाए गए कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों से नुकसान हो रहा है। ये प्रतिबंध पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाए थे, जिन्हें राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी जारी रखा है।
अपने कानून के तहत अमेरिका उन उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा सकता है, जिनमें अमेरिकी उपकरण या अमेरिकी बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल हुआ हो। मई 2020 में लगाए गए प्रतिबंधों का चीनी कंपनी हुवावे पर बहुत खराब असर हुआ। इस प्रतिबंध की वजह से 7 नैनोमीटर या उससे कम माप के उच्च तकनीक वाले चिप्स कंपनी की पहुंच से बाहर हो गए। उससे हुवावे के लिए 5जी फोन बनाना मुश्किल हो गया। नतीजतन, कंपनी का 5जी का बड़ा बाजार उसके हाथ से निकल गया।
चिप बाजार के जानकार डैन हचिसन ने पिछले हफ्ते लिखा था कि ताइवान पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता को खत्म करना चाहता है। नए करार से वह ऐसा करने में सक्षम हो जाएगा। एशिया टाइम्स ने बताया है कि चीन सरकार ने अपने यहां सेमीकंडक्टर के उत्पादन पर खास जोर दिया हुआ है।
इस काम का ज्यादातर ठेका ताइवानी कंपनियों के पास ही है। ताइवान की चिप निर्माता कंपनियां चीन में अपनी अग्रणी भूमिका बनाए रखना चाहती हैं। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों से रुकावट आने का अंदेशा उन्हें था। तो अब उन्होंने एहतियाती कदम उठा लिया है। इससे संकेत मिला है कि प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी नीति अब उसके लिए हानिकारक साबित हो रही है।