somali foreign minister mohamoud and taiwan president
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चीन के दबाव के बावजूद ताइवान ने सोमालीलैंड के साथ हाथ मिलाकर नए कूटनीतिक संबंध स्थापित किए हैं। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा, दोनों सरकारों ने मित्रता और स्वतंत्रता, लोकतंत्र, न्याय और कानून के शासन के मूल्यों के आधार पर संबंध स्थापित करने को लेकर सहमति जताई है। ताइवान और सोमालीलैंड मत्स्य, कृषि, ऊर्जा, खनन, लोक स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।
वहीं चीन ताइवान के इस कदम से चिढ़ गया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि ताइवान सोमालिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमतर कर रहा है। ताइवान और सोमालीलैंड के बीच आधिकारिक एजेंसी स्थापित करने या किसी तरह के आधिकारिक समझौते का चीन विरोध करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्रम में सोमालीलैंड के विदेश मंत्री यासिन हागी महमूद व जोसेफ वु ने 26 फरवरी को ताइपे में द्विपक्षीय संबंधों पर हस्ताक्षर किए थे। सोमालीलैंड की कुल आबादी 39 लाख है।
ड्रैगन के दबाव से सीमित हुए रिश्ते
चीनी दबाव के चलते लोकतांत्रिक ताइवान के रिश्ते सीमित होकर मात्र 15 देशों के साथ रह गए हैं और इस कारण से वह संयुक्ते राष्ट्र की सदस्यता भी खो चुका है। इसके अलावा जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों में चीन का वर्चस्व है, उनसे भी ताइवान बाहर है। बता दें कि ताइवान पर चीन अपना दावा करता है और धमकी देता है कि जरूरत पड़ने पर वह सैन्य ताकत का भी इस्तेमाल कर सकता है। चुनावों व जनमत सर्वेक्षण में ताइवान की जनता चीन के साथ एकीकरण को खारिज कर चुकी है।
स्वतंत्र सरकार और मुद्रा
सोमालिया से सोमालीलैंड वर्ष 1991 में गृहयुद्ध के बाद अलग हुआ था। साथ ही इस दौरान हिंसा व चरमपंथी हमलों का भी सामना करना पड़ा था। अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं होने के बावजूद इस क्षेत्र की अपनी स्वतंत्र सरकार, मुद्रा और सुरक्षा व्यवस्था है।