ताइवान में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर बेकाबू बनी हुई है। इससे वहां सख्त लॉकडाउन की आशंका गहराती जा रही है। ताइवान में अब तक सिर्फ एक फीसदी आबादी का टीकाकरण हुआ है। इसलिए वहां संक्रमण के मौजूदा ट्रेंड से चिंता लगातार गहरा रही है। इससे दुनिया के दूसरे कई देश भी गहरी चिंता में है। चीन के साथ जिन देशों के संबंध हाल में बिगड़े हैं, उनमें ज्यादातर को सेमी कंडक्टर्स की सप्लाई ताइवान से होती है। अब इस सप्लाई में रुकावट पड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
जानकारों के मुताबिक दुनिया पहले से ही सेमी कंडक्टर्स की कमी का सामना कर रही है। अब ताइवान से भी सप्लाई बाधित हुई, तो कार उद्योग सहित कई दूसरे उद्योगों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ताइवान वैक्सीन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की समस्या से जूझ रहा है। चीन ने उसे वैक्सीन देने की पेशकश की थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से ताइवान सरकार ने उसे ठुकरा दिया। अब उसने पश्चिमी कंपनियों से अधिक वैक्सीन सप्लाई की गुहार लगाई है, लेकिन इससे तुरंत कोई लाभ नहीं हुआ है।
ताइवान के न्यूयॉर्क स्थित हेट ऑफिस ने रविवार को चेतावनी दी थी कि अगर ताइवान को अधिक संख्या में वैक्सीन उपलब्ध नहीं करवाए गए, तो सेमी कंडक्टर्स की सप्लाई में बाधा पड़ सकती है। लेकिन जानकारों का कहना है कि चीन से रिश्ते बिगड़ने के बाद ज्यादातर देश अपने सेमी कंडक्टर्स उद्योग में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। अगर ताइवान से सप्लाई रुकी, तो वे इस दिशा में और तेजी से कदम उठाएंगे। इससे लंबी अवधि में ताइवान को नुकसान होगा, क्योंकि अभी बाजार पर उसकी जो पकड़ है, वो कमजोर हो जाएगी।
अमेरिकी कंपनी इंटेल कॉर्प के सीईओ पैट जेलसिंगर ने टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स से कहा- ‘मुझे ऐसा लगता है कि हम ताइवान और दक्षिण कोरिया पर अत्यधिक निर्भर हो गए हैं। हमें अधिक संतुलित वैश्विक सप्लाई चेन की जरूरत है।’ इंटेल दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है। जेलसिंगर ने कहा कि अब अमेरिका और यूरोप को सेमी कंडक्टर उत्पादन के मामले में एशिया की बनी बढ़त से पैदा हुए असंतुलन को दूर करने के लिए अधिक आक्रामक ढंग से काम करना चाहिए।
जापान टाइम्स के मुताबिक इंटेल ने सेमी कंडक्टर्स के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नई योजनाएं बनाई हैं। दरअसल, अमेरिका सरकार अपने देश में सेमी कंडक्टर्स उद्योग को बढ़ावा दे रही है। अमेरिका की व्यापार मंत्री गिना रायमोंडो ने इसी महीने कहा था कि जो बाइडन प्रशासन चिप की कमी दूर करने के लिए ताइवान की कंपनियों के साथ मिल कर काम कर रहा है। साथ ही वह इस मामले में ताइवान पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल, टीएसएमसी पश्चिमी देशों को चिप सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। एपल और क्वालकॉम इंक जैसी कंपनियां अपने उत्पादों में उसके ही चिप का इस्तेमाल करती हैँ। लेकिन अब ऐसा लगता है कि उसका और दूसरी ताइवानी कंपनियों का दबदबा टूटने वाला है। कोरोना महामारी ने ताइवान के लोगों की सेहत के साथ-साथ ताइवान की चिप इंडस्ट्री के लिए भी बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है।