स्विट्जरलैंड में बुर्के पर बैन को लेकर चल रही बहस आखिरकार रविवार को खत्म हो गई और स्विस मतदाताओं ने अपने मत देकर यह फैसला कर दिया कि देश में अब सार्वजनिक जगहों पर बुर्का या नकाब नहीं पहन सकेंगे।
हालांकि प्रतिबंध लगाने के पक्ष वालों और प्रतिबंध के विरोध में वोट करने वालों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बेहद कम रहा। ब्रॉडकास्टर एसआरएफ के अनुमान के अनुसार, करीब 54 फीसदी लोगों ने जहां प्रतिबंध लगाने के पक्ष में वोट किया वहीं 46 फीसदी ने प्रतिबंध ना लगाने के लिए मतदान किया।
दक्षिण पंथी स्विस पीपल्स पार्टी ने रविवार को हुए मतदान के दौरान 'अतिवाद बंद करो' जैसे नारे भी लगाए। वहीं एक प्रमुख स्विस इस्लामिक समूह ने कहा कि मुसलमानों के लिए यह एक 'काला दिन' था। कई मुस्लिमों ने आगाह किया है कि इस तरह के बैन से देश में लोगों के बीच मतभेद गहरे हो सकते हैं।
सेंट्रल काउंसिल ऑफ मुस्लिम ने एक बयान जारी कर कहा कि 'आज के फैसले से पुराने जख्म एक बार फिर ताजा हो गए हैं। इससे कानूनी असमानता के सिद्धांत को और बल मिला है और साथ ही मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अलग रखे जाने के भी स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
स्विस सरकार ने प्रतिबंध के खिलाफ तर्क देते हुए कहा था कि यह तय करना राज्य के अधीन नहीं है कि महिलाओं को क्या पहनना चाहिए। ल्यूसर्न विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, स्विट्जरलैंड में लगभग कोई भी बुर्का नहीं पहनता है। केवल 30 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो नकाब पहनती हैं। स्विट्जरलैंड की 86 लाख आबादी में पांच फीसदी आबादी मुस्लिमों की है जिसमें से ज्यादातर तुर्की, बोस्निया और कोसोवो से हैं।
बता दें कि फ्रांस ने साल 2011 में ही चेहरे को पूरी तरह से ढंकने वाले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड और बुल्गेरिया में भी सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने पर पाबंदियां हैं।