फिनलैंड की पीएम सना मारिन(बाएं) और स्वीडन की पीएम मैग्डेलेना एंडरसन(दाएं)
अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो (NATO) गठबंधन की सदस्यता के लिए स्वीडन और फिनलैंड ने तैयारी पूरी कर ली है। दोनों देशों ने मई के मध्य तक आवेदन जमा करने पर सहमति जता दी है। अगर आवेदन को स्वीकृति मिल जाती है तो ये दो देश जल्द ही इसके सदस्य बन जाएंगे। बता दें कि ये दो देश भी यूक्रेन संकट के दौरान रूस की तानाशाही का विरोध करते आए हैं। अगर इन दोनों देशों को नाटो की सदस्यता मिलती है तो जाहिर है कि ये रूस के लिए चुनौती बन सकते हैं। हालांकि रूस ने भी इन दो देशों को नाटो से नहीं जुड़ने की चेतावनी दे दी है।
रूस पहले ही दे चुका है चेतावनी
बता दें कि द्विपक्षीय राजनयिक माध्यमों से रूस कई बार स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल होने के नतीजों के बारे में चेतावनी दे चुका है। अगर ऐसे में दोनों देश सदस्या के लिए कदम बढ़ा रहे हैं तो फिर आने वाले समय में किसी बड़े युद्ध से इनकार नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि रूस ने इन दोनों देशों को चेतावनी देते हुए कहा था कि फिनलैंड या स्वीडन नाटो में शामिल होने का फैसला करते हैं तो रूस बाल्टिक देशों और स्कैंडिनेविया के करीब परमाणु हथियार तैनात करेगा।
फिनलैंड, रूस के साथ 1300 किलोमीटर की सीमा साझा करता है
फिनलैंड रूस के साथ 1300 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारिन ने भी रूस की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा था कि उनका देश नाटो में शामिल होने को लेकर अगले कुछ हफ्तों में फैसला करेगा।
जानें क्या है नाटो, वर्तमान में 30 देश इसके सदस्य
रूस और यूक्रेन विवाद में जिस संगठन की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है उस संगठन का नाम है नाटो। नाटो का निर्माण 1949 में हुआ था। इसकी सदस्यता कुल 30 देशों ने ले रखी है। यदि फिनलैंड और स्वीडन को भी सदस्यता मिलती है को कुल सदस्य देश 32 हो जाएंगे। इसके लिए अमेरिका सबसे अधिक फंडिंग करता है। नाटो का मतलब उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization) है।