फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khamenei: मुहर्रम के मातम जुलूस में दिखे खामनेई; इस्राइल से टकराव में हताहत हजारों ईरानी लोगों को भी किया याद

Sun, 06 Jul 2025 02:41 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान

सार

ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई मुहर्रम के मातम जुलूस में शामिल हुए। इस्लामिक कैलेंडर के महीने मुहर्रम की 10वीं तारीख को आशूरा कहा जाता है। शिया समुदाय के मुस्लिम इस दिन पैगंबर मोहम्मद के पोते इमाम हुसैन की शहादत को याद कर मातम करते हैं। इमाम हुसैन  680 ई. में कर्बला की जंग में अपने परिवार के साथ शहीद हुए थे।
विज्ञापन
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशियाई देशों- ईरान और इस्राइल के बीच 12 दिनों तक चला टकराव बीते 24 जून को खत्म हुआ। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई 13 जून को इस्राइली हमलों के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे थे। अब 5 जुलाई को मुहर्रम के मातम जुलूस में उन्हें देखा गया। तेहरान में आशूरा की पूर्व संध्या पर मुहर्रम के मातम जुलूस में खामनेई के पहुंचने पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस कार्यक्रम में संसद अध्यक्ष समेत कई बड़े अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

विज्ञापन


नारे लगाती भीड़ की ओर हाथ और सिर हिलाया, नहीं दिया भाषण
युद्ध के दौरान खामनेई की गैरमौजूदगी ने ईरानी नेता के लिए कड़ी सुरक्षा का संकेत दिया, क्योंकि वह देश के सभी बड़े फैसले खुद लेते हैं। ईरान में सरकारी टीवी ने दिखाया कि मातम जुलूस के दौरान नारे लगाती भीड़ की ओर खामनेई ने हाथ और सिर हिलाया। हालांकि, इस दौरान उन्होंने कोई भाषण नहीं दिया। 

ये भी पढ़ें: Bangladesh: छात्र नेतृत्व वाली NCP की मांग, बांग्लादेश में 'न्याय और सुधार' होने तक रोके जाएं चुनाव
विज्ञापन


सुन्नियों के हाथों हुसैन की मौत से इस्लाम में आई दरार
दुनिया के लगभग 1.8 बिलियन मुसलमानों में से करीब 10 फीसदी शिया हैं। वे हुसैन को पैगंबर मोहम्मद का असली उत्तराधिकारी मानते हैं। बगदाद के दक्षिण में कर्बला में हुए युद्ध में हुसैन की सुन्नियों के हाथों मौत हो गई, जिससे इस्लाम में शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच दरार पैदा हो गई। 

ईरान में लाल झंडे हुसैन के खून का प्रतीक
ईरान में शोक मनाने के दौरान लाल झंडे हुसैन के खून का प्रतीक होते हैं और काले कपड़े मातम का। लोग छाती पीटते हैं, खुद को कोड़े मारते हैं और भीषण गर्मी में पानी छिड़ककर शोक जताते हैं।

युद्ध में 900 से ज्यादा ईरानियों की हुई मौत 
ईरान ने इस्राइल के साथ युद्ध में 900 से ज्यादा लोगों की मौत और हजारों लोगों के घायल होने की बात स्वीकार की है। साथ ही देश की परमाणु सुविधाओं को गंभीर नुकसान होने की भी पुष्टि की है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था के निरीक्षकों को परमाणु ठिकानों पर जाने की अनुमति नहीं दी है। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Conflict: इस्राइल ने गाजा पर फिर किए हवाई हमले, 47 की मौत; हमास ने 60 दिन की युद्धविराम वार्ता पर जताई सहमति

13 जून को शुरू हुआ था ईरान-इस्राइल युद्ध
इस्राइल ने 13 जून से ईरान पर लगातार हमले किए। इस दौरान इस्राइल ने ईरान के परमाणु ठिकाने, रक्षा प्रणालियों, सेना के बड़े अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल पर 550 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर को इस्राइल ने रोक दिया, लेकिन जो मिसाइलें इस्राइल के अंदर घुसीं, उनसे कई क्षेत्रों में नुकसान हुआ और 28 लोग मारे गए। 

संबंधित वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें