ईरानी सैनिकों पर हमला करने वाला आत्मघाती हमलावर पाकिस्तानी नागरिक था। ये हमला 13 फरवरी को हुआ था, जिसमें ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के 27 सैनिकों की मौत हो गई और 13 सैनिक घायल हुए। गार्ड्स के जमीनी बल के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद पाकपौर का कहना है कि, "फिदायीन हमलावर का नाम हफीज मोहम्मद अली था और वह पाकिस्तानी नागरिक था।"
ये हमला पाकिस्तान से लगते ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में हुआ था। ब्रिगेडियर जनरल का कहना है कि इस बात का खुलासा हमले की तहकीकात के बाद हुआ है। वहीं विस्फोट से लदी गाड़ी के मॉडल की पहचान भी कर ली गई है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार हमले के पीछे जो दो अन्य लोग जिम्मेदार थे, वो भी पाकिस्तानी थे।
हमलावर की पहचान हाफिज मोहम्मद अली के तौर पर हुई है। जनरल ने कहा कि कार का मॉडल पता चलने के बाद अभी भी जांच जारी है। दो दिन पहले पहला सुराग मिला, एक महिला को गिरफ्तार किया गया। इसी महिला के सहारे अन्य लोगों तक जांचकर्ता पहुंच पाए। पाकपौर ने कहा कि हमला करने वालों में तीन ईरानी भी शामिल थे, जिनमें से दो को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पाकपौर ने बताया कि इस हमले को 11 फरवरी को अंजाम दिया जाना था। इसी दिन ईरान की इंस्लामी क्रांति की 40वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। लेकिन उस दिन सुरक्षा बल पूरी तरह तैनात था। जिसके चलते उस दिन हमला नहीं हो सका। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-अल-अदल (इंसाफ की फौज) नाम के आतंकी संगठन ले ली है। तहरान का कहना है कि यह पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन है।
इस मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान ईरान को जांच में पूरा सहयोग दे रहा है। उन्होंने एक टेलीविजन शो में ये बात कही थी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी का कहना है कि हमले के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं उन्हें वह सजा दिलाएंगे। बता दें जैश-अल-अदल पाकिस्तान स्थित एक आतंकी सुन्नी संगठन है।
इस इलाके में बलूच अलगाववादियों की ईरानी सेना के साथ झड़प बेहद आम बात है। यह हमला 1979 में हुई ईरान की मशहूर इस्लामिक क्रांति की 40 सालगिरह के दो दिन बाद किया गया।