लॉकडाउन को कोरोना वायरस की कड़ी तोड़ने का प्रभावी हथियार माना गया है। यही वजह है कि पूरी दुनिया में ही इसका पालन किया गया। इससे कोरोना संक्रमण की गति को कम करने में काफी मदद भी मिली। लेकिन यह स्थायी हल नहीं है। गिरती अर्थव्यवस्था के मद्देनजर दुनियाभर में लॉकडाउन को खोला जा रहा है। आठ जून से हमारे देश में भी लॉकडाउन के स्थान पर अनलॉक-1 लागू होने जा रहा है।
यह अनलॉक भी तभी कारगर होगा जब लोग सोशल डिस्टेंसिंग या सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करेंगे। अगर यह दूरी एक मीटर से कम हो तो संक्रमण का खतरा 13 फीसदी रहता है। जबकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच की दूरी एक मीटर से कम होने पर कोरोना संक्रमण का खतरा पांच गुना तक घटकर 2.6 प्रतिशत रह जाएगा। ऐसा ही मास्क लगाने और न लगाने की स्थिति में भी होगा।
आंखों को नहीं बचाया तो संक्रमण का खतरा 16 फीसदी
आंखों की बीमारियों पर शोध करने वाली अमेरिका की ऑप्थेल्मोलॉजी अकादमी के डॉक्टरों के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के आंसू भी वायरस फैला सकते हैं। जिस तरह कोई संक्रमित व्यक्ति खांसने, छींकने और अपने हाथ-पैर के स्पर्श से कोरोना फैला सकता है। उसी प्रकार उसके आंसू भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं। बार-बार हाथ धोने के साथ-साथ आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा लगाकर चेहरे को ढंकने में ही समझदारी और सतर्कता है।