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अध्ययन: फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन पूरी तरह कारगर, संक्रमण पर लगाती है रोक

Thu, 29 Apr 2021 09:04 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

अमेरिका ने टीकाकरण के जरिए कोरोना पर नियंत्रण करने का काम किया और यह संभव हुआ अमेरिकी कंपनी फाइजर और मॉडर्ना द्वारा विकसित की गई वैक्सीन से।
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Pfizer vaccine (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना वायरस से पूरी दुनिया मे ंसबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका में धीरे-धीरे हालात ठीक हो रहे हैं। अमेरिका ने टीकाकरण के जरिए कोरोना पर नियंत्रण करने का काम किया और यह संभव हुआ अमेरिकी कंपनी फाइजर और मॉडर्ना द्वारा विकसित की गई वैक्सीन से। इसी बीच एक अध्ययन में यह सामने आया है कि फाइजर और मॉर्डना कंपनी की वैक्सीन कोरोना से लड़ने में पूरी तरह कारगर है। इन दोनों कंपनियों की वैक्सीन लेने के बाद संक्रमण से बचा जा सकता है।

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अमेरिका में टीकाकरण का काम दिसंबर 2020 में ही शुरू हो गया था। अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने सबसे पहले फाइजर और उसके बाद मॉडर्ना के टीके को मंजूरी दी थी।

सरकारी शोधकर्ताओं ने बताया कि 'फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन कोविड-19 से लड़ने में कारगर है। इन दोनों कंपनियों के टीकों से लोगों को न केवल कोरोना बीमारी से बल्कि प्रभावी रूप से कोरोना वायरस संक्रमण होने से भी बचाया गया। पहली खुराक लेने के दो सप्ताह बाद शरीर में काफी इम्यूनिटी विकसित होने और लोगों को कोरोना संक्रमण से पर्याप्त सुरक्षा मिलने के संकेत सामने आए।
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अध्ययन में कहा गया है कि फाइजर और मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन की दो खुराक लेने के बाद संक्रमण के खिलाफ 90 फीसदी तक सुरक्षा मिलती है। यह वास्तविक दुनिया में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोक सकती है। यह शोध अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) द्वारा किया गया है।  

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन स्टडी की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, टीकों की दो खुराकें संक्रमण के खिलाफ 90 फीसदी सुरक्षा प्रदान करती हैं। इससे पहले नैदानिक परीक्षणों (क्लीनिकल ट्रायल) में देखा गया  था कि वैक्सीन कोरोना बीमारी होने पर अस्पताल में भर्ती होने से और मौत होने से बचाती है।

सीडीसी द्वारा किए गए इस अध्ययन में अमेरिका के चार हजार फ्रंटलाइन वर्कर्स को शामिल किया गया था। इसमें स्वास्थ्य कर्मचारी, सर्विस वर्कर और शिक्षक आदि शामिल थे। 

अध्ययन इस बात का प्रमाण देता है कि शरीर में मौजूद मैसेंजर आरएनए तकनीक से बने नए टीके वास्तव में वास्तविक दुनिया की स्थितियों में वायरस के प्रसार को कम करते हैं। वहीं इस्रायल में भी वैक्सीन के प्रभाव को लेकर एक अध्ययन किया गया था, जिसमें बताया गया था कि फाइजर की वैक्सीन की एक खुराक लेने के बाद भी संक्रमण से 85 फीसदी तक सुरक्षा मिलती है। इस्रायल ने इस वैक्सीन के बच्चों पर भी प्रभावी होने का दावा किया था। 

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