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Thiruvalluvar: फ्रांस में तमिल कवि तिरुव्ल्लुवर की प्रतिमा का उद्घाटन, पीएम मोदी ने जाहिर की थी इच्छा

Mon, 11 Dec 2023 03:56 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस

सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह प्रतिमा हजारों लोगों को तिरुवल्लुवर के नेक विचारों का पालन करने के लिए प्रेरिक करेगी। यह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का एक और प्रतीक है।
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विस्तार
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भारत की संस्कृति की छाप एक बार फिर यूरोप में नजर आएगी। यूरोपीय देश फ्रांस में आज तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का उद्घाटन हुआ। तिरुवल्लुवर की प्रतिमा के स्थापना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा सांस्कृतिक संबंधों का सुंदर प्रमाण बताया है। बता दें, फ्रांस के आखिरी दौरे के दौरान पीएम मोदी ने तिरुवल्लुवर की मूर्ति स्थापना की इच्छा जाहिर की थी।  
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भारत और फ्रांस सच्चे मित्र हैं
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह प्रतिमा हजारों लोगों को तिरुवल्लुवर के नेक विचारों का पालन करने के लिए प्रेरिक करेगी। यह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का एक और प्रतीक है। इससे विश्व में संदेश जाएगा कि भारत-फ्रांस सच्चे मित्र हैं। फ्रांस में भारत के दूत जावेद अशरफ ने भी ट्वीट कर प्रतिमा के उद्घाटन की जानकारी दी। जयशंकर ने बताया कि 13 जुलाई को बैस्टिल दिवस परेड के लिए पेरिस पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने मूर्ति की स्थापना की इच्छा जाहिर की थी, जिसे फ्रांस सरकार ने रविवार को पूरा कर दिया। मूर्ति की स्थापना राजधानी पेरिस के पास सेर्गी शहर में किया गया है। उद्घाटन कार्यक्रम में सेर्गी के मेयर जीनडॉन और पुडुचेरी के मंत्री के लक्ष्मीनारायण सहित अन्य अधिकारी और नेता उपस्थित थे।



पीएम मोदी ने दी प्रतिक्रिया
मेयर जीनडॉन ने मूर्ति स्थापना की तस्वीरें भी साझा की। एक्स पर जीनडॉन की पोस्ट पर पीएम मोदी ने प्रतिक्रिया दी। प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि फ्रांस के सेर्गी में प्रतिमा की स्थापना हमारे साझा सांस्कृतिक संबंधों का एक सुंदर प्रमाण है। ज्ञान के प्रतीक के रूप में तिरुवल्लुवर की प्रतिमा वहां स्थापित की गई है। तिरुवल्लुवर का लेखन दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित करता है।
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अब जानिए कौन हैं तिरुवल्लुवर
बता दें, उत्तर भारत में तुलसी, सूरदास, कबीर और रसखान का जो स्थान है। वही दक्षिण भारत में संत एवं प्रख्यात कवि तिरुवल्लुवर का है। दक्षिण में उनके रचित ग्रंथ और संग्रह रामचरितमानस की तरह पढ़े जाते हैं। कई विश्वविद्यालयों में संत तिरुवल्लुवर पर आधारित शोधपीठ विद्यमान है। उनका जन्म ईसा पूर्व पहली शताब्दी में हुआ था। तब से आज तक तिरुवल्लुवर के ग्रंथ दक्षिण भारत के चारों राज्यों में घर-घर विद्यमान हैं।
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