दुनिया भर में मानव आबादी लगातार बढ़ रही है। इसके कारण प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है, जो जलवायु को प्रभावित कर रहा है। इस मामले में भारत और पाकिस्तान जैसे देशों की हालत बहुत खराब हो रही है। द स्टेट ऑफ क्लाइमेट इन एशिया 2021 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल सूखे की वजह से होने वाला आर्थिक नुकसान 63 फीसदी बढ़ा है। वहीं, बाढ़ से 23 फीसदी और भूस्खलन से 147 फीसदी नुकसान बढ़ गया। ये तुलना साल 2001 से 2020 के औसत आर्थिक नुकसान से की गई है। इसके बावजूद भविष्य में इससे निपटने के लिए एशियाई देश कोई तैयारी नहीं कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष दुनियाभर में 2.88 लाख करोड़ रुपये का नुकसान सिर्फ पानी से संबंधित प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हुआ है। इससे करीब पांच करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। एशिया के सभी ऊंचे इलाके में फैला हिमालय और तिब्बत के पठार भारत, पाकिस्तान और चीन के लिए पानी का स्रोत हैं।
हिमालय के ग्लेशियर पिघलने के कारण सूखे के हालात
द स्टेट ऑफ क्लाइमेट इन एशिया-2021 रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 40 साल में हिमालय के पांच बड़े ग्लेशियर तेजी से पिघले हैं। सूखे और बढ़ते तापमान का असर दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार, पूर्वी हिमालय प्रभावित हुए हैं।
100 से अधिक आपदाओं की दस्तक
साल 2021 में एशिया में 100 से ज्यादा प्राकृतिक आपदाएं आईं, जिसमें से 80 फीसदी बाढ़ और तूफान से संबंधित थे। इनकी वजह से 4 हजार लोगों की मौत हुई। इनमें ज्यादातर मौतें बाढ़ की वजह से हुईं। इन आपदाओं से 4.83 करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए।
ईरान, इराक समेत अफगानिस्तान में सूखे की मार
सबसे ज्यादा सूखा ईरान, इराक, अफगानिस्तान और अरब प्रायद्वीप में पड़ा। रूस के सुदूर पूर्वी इलाके और साल 2021 में दक्षिण-पश्चिम एशिया और पूर्वी साइबेरिया में सालाना औसत से कम बारिश हुई है।
बारिश से बेहाल रहे पांच देश
भारत, पाकिस्तान, म्यांमार और चीन पश्चिमी और पूर्वी एशियाई इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर था। ये देश भारी बारिश से प्रभावित रहे। इन देशों के मध्य साइबेरिया में सामान्य से नीचे थे।