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Sri Lanka: यूनिसेफ की चेतावनी- महंगाई के कारण नियमित भोजन छोड़ रहे लाखों श्रीलंकाई, कुपोषण ने बढ़ाई चिंता

Sat, 27 Aug 2022 07:58 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

यूनिसेफ ने कहा कि आर्थिक संकट ने श्रीलंका के सामाजिक बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर किया है। उन्होंने कहा, सभी उम्र की लड़कियों और लड़कों के लिए सीखने की निरंतरता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे अपने भविष्य की तैयारी कर सकें।
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UNICEF - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूनिसेफ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि श्रीलंका अपनी सबसे खराब आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है। लोगों को जरूरी खाद्य पदार्थ मिलने मुश्किल हो गए हैं, कुपोषण इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा है और इसकी सबसे ज्यादा कीमत यहां के गरीब, सबसे कमजोर लड़कियां और लड़के चुका रहे हैं। 
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यूनिसेफ के दक्षिण एशिया के लिए क्षेत्रीय निदेशक जॉर्ज लारिया अदजेई ने कहा कि नई खाद्य असुरक्षा ने पहले सी ही त्रस्त द्वीप राष्ट्र के सामाजिक मुद्दों को बढ़ा दिया है। परिवार इसलिए नियमित भोजन छोड़ रहे हैं क्योंकि मुख्य खाद्य पदार्थ महंगे हो गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "बच्चे भूखे सो रहे हैं, यह निश्चित नहीं है कि उनका अगला भोजन कहां से आएगा।"
 
दक्षिण एशिया में श्रीलंका में पहले से ही 'गंभीर कुपोषण'
अदजेई  ने कहा, "आर्थिक संकट से प्रभावित श्रीलंकाई बच्चों की मदद के लिए और कदम उठाए जाने चाहिए। बच्चों को तब तक समाधान के केंद्र में रखने के जरूरत है जब तक देश संकट को हल करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि बड़े पैमाने पर खाद्य असुरक्षा इस क्षेत्र में कुपोषण, गरीबी, बीमारी और मृत्यु को और बढ़ा देगी। इस क्षेत्र में श्रीलंका में गभीर कुपोषण पहले से ही सबसे ज्यादा है।"   
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यूनिसेफ ने शुक्रवार को ट्वीट किया, "जैसा कि आर्थिक संकट, श्रीलंका को परेशान कर रहा है, यह सबसे गरीब, सबसे कमजोर लड़कियां और लड़के हैं जो सबसे ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।"

आर्थिक संकट का शिक्षा क्षेत्र पर भी पड़ रहा असर
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि श्रीलंका में आधे बच्चों को पहले से ही किसी न किसी रूप में आपातकालीन सहायता की आवश्यकता है। आर्थिक संकट का शिक्षा क्षेत्र पर भी असर पड़ा है। छात्रों के नामांकन में कमी देखी गई है। संसाधनों की कमी के कारण पुराना बुनियादी ढांचा चरमरा गया है। 

संस्थागत देखभाल में दस हजार से अधिक बच्चे
अदजेई ने कहा कि बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, शोषण और हिंसा में वृद्धि की खबरें पहले ही सामने आ रही हैं। बयान में कहा गया है, "श्रीलंका में पहले से ही 10 हजार से अधिक बच्चे संस्थागत देखभाल में हैं, मुख्यत: गरीबी के कारण। ये संस्थान, जरूरी पारिवारिक सहायता प्रदान नहीं करते हैं जो बचपन में विकास के लिए आवश्यक हैं। दुर्भाग्य से मौजूदा संकट अधिक से अधिक परिवारों को अपने बच्चों को इन संस्थानों में रखने के लिए प्रेरित कर रहा है, क्योंकि वे अब उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं।"

आर्थिक संकट ने श्रीलंका के सामाजिक बुनियादी ढांचे को उजागर किया
यूनिसेफ के दक्षिण एशिया के लिए क्षेत्रीय निदेशक ने आगे कहा कि आर्थिक संकट ने श्रीलंका के सामाजिक बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर किया है। उन्होंने कहा, "सभी उम्र की लड़कियों और लड़कों के लिए सीखने की निरंतरता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे अपने भविष्य की तैयारी कर सकें और बाल श्रम, शोषण और लिंग आधारित हिंसा के खतरों से बच सकें।"

बच्चों की रक्षा के लिए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता
उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को जानलेवा बीमारियों और कुपोषण से बचाने के लिए केंद्रीय और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि वैश्विक आर्थिक मंदी के सबसे बुरे प्रभावों के खिलाफ बच्चों की रक्षा के लिए तुरंत कार्रवाई नहीं की जाती है तो कमजोर बच्चे और गरीबी में चले जाएंगे और उनके स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से समझौता किया जाएगा। 

बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आज से शुरू हो काम
बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए कि वह संकट के खिलाफ स्थानीय समुदायों में निवेश करें। यूनिसेफ ने कहा कि श्रीलंका का आपातकाल अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी चेतावनी है। उन्होंने कहा कि हम बच्चों उस संकटों की कीमत नहीं चुकाने दे सकते जो संकट उन्होंने पैदा नहीं किए हैं। हमें उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आज से ही कार्य शुरू करना चाहिए। 

22 मिलियन की आबादी वाला देश श्रीलंका सात दशकों में अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल की चपेट में है। आर्थिक संकट के कारण लाखों लोगों ने भोजन, दवा, ईंधन और अन्य आवश्यक चीजों के लिए संघर्ष करना छोड़ दिया है। 
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