श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे
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श्रीलंका ने हाल ही में अपने इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक संकट झेला है। धीरे-धीरे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। इसी के साथ श्रीलंका की सरकार पॉलिसी भी बना रही है। इसी कड़ी में श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने संबंधित सरकारी विभागों को तमिलों के साथ सुलह के लिए कार्य योजना के कार्यान्वयन की खातिर आवश्यक कानून का मसौदा बनाने में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
सुलह की कार्ययोजना सरकार की कोशिशों का हिस्सा
श्रीलंका ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और देश के सशस्त्र बलों के बीच लंबी सशस्त्र लड़ाई सहित तीन दशक तक संघर्ष का सामना किया है। श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांत में तमिलों के लिए अलग राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर चलाया गया लिट्टे का अलगाववादी अभियान 18 मई, 2009 को श्रीलंकाई सेना द्वारा लिट्टे सुप्रीमो वी प्रभाकरण को मार गिराए जाने के बाद समाप्त हो गया था। श्रीलंका सरकार ने 2015 में सुलह की अपनी कोशिशों को नये सिरे से शुरू किया था और अनेक कदम उठाए। सुलह की कार्ययोजना ऐसे अनेक मुद्दों से जुड़ी व्यापक राष्ट्रीय नीति की सरकार की कोशिशों का हिस्सा है।
राष्ट्रपति ने इन क्षेत्रों की समीक्षा की
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा कि गुरुवार को एक बैठक के दौरान, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कानून व्यवस्था, संस्थागत गतिविधियों, भूमि मुद्दों, कैदियों की रिहाई और शक्ति विकेंद्रीकरण जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में पहलों समीक्षा की गई। वहीं सत्य और सुलह आयोग का कार्यान्वयन, एक राष्ट्रीय भूमि परिषद की स्थापना और एक राष्ट्रीय भूमि नीति का निर्माण उन मामलों में शामिल थे जिन पर चर्चा हुई।
गुमशादा लोगों के कार्यालय संचालन में तेजी लाने को कहा
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ने गुमशुदा व्यक्तियों के कार्यालय को तेजी से काम करने और संचालन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें डिजिटलीकरण के प्रयास और उन व्यक्तियों के लिए अनुपस्थिति प्रमाण पत्र जारी करना शामिल है, जो पहले बिना किसी निशान के गायब हो गए थे।