Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe
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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने तमिल समस्या का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश तेज कर दी है। इस मामले में राजनीतिक आम सहमति तैयार करने की कोशिश में उन्होंने अगले 11 दिसंबर को सभी दलों के सांसदों की बैठक बुलाई है। देश में ज्यादातर तमिल अल्पसंख्यक उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में रहते हैं। तमिल आतंकवादी संगठनों के साथ तीन दशक तक चला गृह युद्ध 2009 में खत्म हो गया था। लेकिन तमिलों की राजनीतिक शिकायतों का आज तक हल नहीं हो सका है।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा करते हुए विक्रमसिंघे ने बुधवार को कहा- ‘अब बात करने के लिए कुछ नया नहीं है। हमें इस बारे में फैसला करना है। मेरी राय में हम अगले साल इस बारे में प्रासंगिक निर्णय तक पहुंच सकते हैं। मेरा उद्देश्य यह है कि देश की आजादी की 75वीं सालगिरह तक ये फैसला हो जाए। अगर हम आज यह नहीं कर सकते, तो फिर 2048 तक भी हम ऐसा नहीं कर पाएंगे।’
इसके पहले विक्रमसिंघे अगले वर्ष चार फरवरी से पहले सभी तमिल राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने का एलान कर चुके हैं। बीते 10 नवंबर को उन्होंने तमिल पार्टियों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया था कि वे बिना विदेशी हस्तक्षेप के इस समस्या का हल ढूंढने में मददगार बनें। इसके पहले अखबार संडे टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि प्रस्तावित समाधान की रूपरेखा तय करने के लिए मंत्रियों का एक दल बनाया जाएगा।
बुधवार को श्रीलंका की संसद में तमिल समस्या पर चर्चा हुई। उस दौरान विक्रमसिंघे ने तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) के नेता एमए सुमंतिरन से पूछा कि क्या वे समाधान की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हैं। राष्ट्रपति ने यही सवाल मुख्य विपक्षी दल समगी जना बलावेगया (एसजेबी) के नेता लक्ष्मण किरिएला और डेमोक्रेटिक पीपुल्स फ्रंट के सांसद मानो गणेशन ने भी पूछा। किरिएला सदन में विपक्ष के मुख्य व्हिप हैं। इस चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा सदन में मौजूद नहीं थे। इस कारण एसजेबी सांसदों ने कहा कि इस बारे में वे अपने नेता से राय-मशविरा करने के बाद राष्ट्रपति को अपना जवाब देंगे।
उधर सुमंतिरन ने कहा- ‘अगर आप सभी दलों की बैठक बजट सत्र के बाद बुलाना चाहते हैं, तो हम इस सत्र को 31 दिसंबर तक ही समाप्त करने पर सहमत हो सकते हैं।’ उनके इस प्रस्ताव पर विक्रमसिंघे सहमत हो गए। उन्होंने कहा कि बजट सत्र जल्द खत्म करने के बाद अगले 11 दिसंबर को सर्वदलीय बैठक होगी।
लेकिन श्रीलंका पोडुजना पेरामुना (एसएलपीपी) के सांसद गेविंदु कुमारातुंगा ने यह साफ किया कि उनकी पार्टी सिर्फ ऐसे ही किसी प्रस्ताव का समर्थन करेगी, जिसमें श्रीलंका की एकात्मक शासन प्रणाली की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा- ‘अगर आप एकात्मक श्रीलंका पर आम सहमति बनाना चाहते हैं, तो हम राजी हैं। लेकिन उससे बाहर जाकर मुझे नहीं लगता कि देश की बहुसंख्यक जनता सहमत होगी। यह एक ठोस स्थिति है। हमारे सैनिकों ने देश के एकात्मक स्वरूप की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की है।’