श्रीलंका ने चीन से 20 हजार टन उर्वरक के साथ आए एक जहाज को लौटा दिया है। चीन के शानदोंग स्थित सीविन बायोटेक फैक्टरी ने इस उर्वरक को श्रीलंका भेजा था। लेकिन उर्वरक की गुणवत्ता पर श्रीलंका ने एतराज जताया। इस बारे में बातचीत से कोई हल न निकलने के बाद जहाज को लौटा दिया गया।
चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक अब ये जहाज सिंगापुर पहुंचने वाला है, जहां सीविन कंपनी श्रीलंका के खिलाफ मुकदमा दायर करेगी। कंपनी ने अंतराष्ट्रीय न्यायाधिकरण प्रक्रिया के तहत इस मुद्दे का समाधान ढूंढने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये सारी कार्यवाही सिंगापुर में चलेगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये विवाद नवंबर के आरंभ में शुरू हुआ था। तभी श्रीलंका के अधिकारियों ने चीन में बने हुए उर्वरकों को अस्वीकार करना शुरू किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन उर्वरकों की गुणवत्ता बहुत खराब है। जबकि चीन ने इस आरोप को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है।
कोलंबो में भी कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी चीनी कंपनी
ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि चीनी कंपनी कोलंबो में भी कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी। कोलंबो और सिंगापुर में कार्यवाहियां साथ-साथ चलेंगी। इन दोनों में कुल मिला कर श्रीलंका से चार करोड़ 97 लाख डॉलर के हर्जाने की मांग की जाएगी। इस बारे में श्रीलंकाई अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा जा चुका है।
चीनी कंपनी ने दावा किया है कि उसने अपने उत्पादों की गुणवत्ता साबित करने के लिए तीसरे पक्ष से प्रमाणपत्र लाने की पेशकश की। लेकिन श्रीलंकाई अधिकारी अपने देश के तट पर पहुंच चुकी खेप को स्वीकार करने से इनकार करते रहे। उसके बाद चीनी कंपनी ने आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में जाने का फैसला किया।
श्रीलंका ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की कंपनी से ऑर्गेनिक उर्वरकों का आयात किया गया था। यहां पहुंचने पर जांच में पाया गया कि इसमें एर्विनिया नामक हानिकारक बैक्टीरिया मौजूद है। इस पर श्रीलंका ने इसे अस्वीकार कर दिया।
कंपनी का दावा, श्रीलंका ने नहीं किया करार का सम्मान
चीनी कंपनी का दावा है कि इस सौदे के लिए जो करार हुआ था, उसमें प्रावधान था कि गुणनत्ता की जांच किसी तीसरे पक्ष से कराई जाएगी। ये इंस्टीट्यूट कौन होगा, इसका फैसला श्रीलंका स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट (एसएलएसआई) करेगा। सीविन का दावा है कि श्रीलंका ने इस प्रावधान का सम्मान नहीं किया है।
चीनी कंपनी की ओर से जो उर्वरक श्रीलंका भेजा गया था, उसमें से ही लिए गए नमूनों को जांच के लिए चाइना कस्टम्स टेस्टिंग सेंटर और स्विट्जरलैंड के एक टेस्टिंग सेंटर को भेजा गया है। उधर, खबर है कि एसएलएसआई ने नमूनों की जांच के लिए जर्मनी के टेस्टिंग इंस्टीट्यूट शुटर ग्रुप को नियुक्त किया है।