श्रीलंका के न्याय मंत्री राजपक्षे ने नागपुर में आयोजित शांति सम्मेलन के इतर कहा कि हमनें अपनी अधिकतर समस्याओं का समाधान प्रधानमंत्री मोदी नीत भारत सरकार से मिले समर्थन से कर लिया है। हमें श्रीलंका में जल्द ही समान्य स्थिति बहाल हो जाने की उम्मीद है।
दरअसल, श्रीलंका पिछले साल अभूतपूर्व आर्थिक संकट में घिर गया था। इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व में सरकार बनी। राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंका ने 30 साल तक गृहयुद्ध का गवाह रहा है, जिसमें करीब 60 हजार लोगों की जान गई। मैंने युद्ध प्रभावित लोगों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं। हमने 2016 में प्रक्रिया शुरू की और लापता लोगों, शांति स्थापना और सुलह के लिए कार्यालय खोला।
राजपक्षे ने महामारी के बाद आर्थिक संकट से निपटने के प्रयासों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब हमने सत्ता संभाली तो अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही थी, महंगाई दर 97 प्रतिशत थी। हम बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। जब सत्ता में आए तो हमारे पास 20 लाख अमेरिकी डॉलर भी नहीं थे और यह सच्चाई हमने जनता से साझा की।
उन्होंने कहा कि हम महंगाई दर 21 प्रतिशत तक लाने में सफल रहे। लोगों को अब बिजली कटौती और कोयले की कमी का सामना करना नहीं पड़ रहा है। आवश्यक वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हमारा विदेश मुद्रा भंडार 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर है और इसके पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
श्रीलंका के विदेश मंत्री ने चीनी समकक्ष के साथ चर्चा की
इस बीच श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने रविवार को अपने चीनी समकक्ष छिन कांग के साथ द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अपने देश के गंभीर आर्थिक संकट पर भी बात की। श्रीलंका के ऋण संकट के कारण पिछले साल देश में बड़े पैमाने पर राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल मच गई थी, जिसके बाद साबरी पहली बार चीन की यात्रा कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच बैठक की एक आधिकारिक रिपोर्ट में छिन के हवाले से महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) परियोजनाओं के संयुक्त निर्माण को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।