Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe
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रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका का राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए जापान को चुना है। उसके बाद वे फिलीपींस जाएंगे, जहां वे दक्षिण एशिया के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक का आयोजन एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) कर रहा है। इन दोनों ठिकानों पर विक्रमसिंघे की कोशिश कर्जदाता देशों को अपने कर्ज रिस्ट्रक्चर करने के लिए राजी करने की होगी। कर्ज रिस्ट्रक्चर से मतलब उसके चुकाने की समयसीमा में ढील और अगर संभव हो तो कर्ज या ब्याज के कुछ हिस्सों को माफ करने से है।
श्रीलंका सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि जापान यात्रा के दौरान विक्रमसिंघे कर्ज रियायत दिलाने के लिए जापान से खास पहल करने की गुजारिश करेंगे। वे अपील करेंगे कि श्रीलंका को द्विपक्षीय कर्ज देने वाले देशों की एक बैठक जापान सरकार बुलाए। इन देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं। श्रीलंका सरकार चाहती है कि उस बैठक में आने वाले देश श्रीलंका के अभूतपूर्व आर्थिक संकट पर गौर करते हुए उसके प्रति उदारता दिखाने का निर्णय लें। कर्ज रिस्ट्रक्चर कर ये देश ऐसा कर सकते हैं।
राष्ट्रपति सचिवालय के एक सूत्र ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से बातचीत में कहा- ‘कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग का मुद्दा राष्ट्रपति के एजेंडे में सबसे ऊपर होगा। टोक्यो में राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की मुलाकात जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से होने की आशा है। एडीबी की बैठक में राष्ट्रपति श्रीलंका के आर्थिक संकट की ताजा स्थिति के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उन प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देंगे, जिसकी योजना उनकी सरकार ने देश को संकट से निकालने के लिए बनाई है।’
यहां सरकारी तौर पर दी गई जानकारी के मुताबिक रानिल विक्रमसिंघे 25 सितंबर को जापान के लिए रवाना होंगे। इसके बाद 28 सितंबर को फिलीपींस की राजधानी मनीला पहुंचेंगे, जहां एडीबी की मेजबानी में वित्त मंत्रियों की 55वीं बहुपक्षीय बैठक होगी। कूटनीतिक विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि इस तरह हाल में बनी यह परंपरा टूट जाएगी, जिसके तहत श्रीलंका के राष्ट्रपति अपनी पहली विदेश यात्रा के तौर पर भारत जाते थे। पूर्व राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे और उसके पहले मैत्रिपला सिरिसेना अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत गए थे।
वित्तीय सलाहकार एजेंसी लजार्ड ने कुछ रोज पहले श्रीलंका की कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग के लिए भारत, चीन और जापान से बातचीत शुरू की है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) श्रीलंका को 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज देने पर राजी हुआ है। लेकिन उसने शर्त लगा दी है कि बाकी कर्जदाता देशों के साथ श्रीलंका का कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग समझौता होने और कुछ प्रस्तावित सुधारों को लागू किए जाने के बाद ही वह ये रकम जारी करेगा।
कूटनीति विशेषज्ञों का कहना है कि विक्रमसिंघे अपनी विदेश नीति में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। वे ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहते, जिससे भारत या चीन में से कोई नाराज हो। एक सरकारी अधिकारी ने कहा है- संभवतया इसीलिए विक्रमसिंघे ने सबसे पहले जापान की यात्रा करने का फैसला किया, जो श्रीलंका का दीर्घकालिक विकास भागीदार रहा है।