महिंदा राजपक्षे(फाइल फोटो)
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इस बीच, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंहे के पद से हटने की संभावना है। मौजूदा संसद को कम के कम अगले साल फरवरी से पहले भंग नहीं किया जा सकता। विक्रमसिंघे को तब तक पद से हटाया नहीं जा सकता, जब तक वह इस्तीफा नहीं दे देते। ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रपति बनने के बाद गोटबाया राजपक्षे अपने बड़े भाई महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे।
महिंदा ने तमिल अलगाववादी युद्ध को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके कारण वह सिंहली बौद्ध बहुल समुदाय के प्रिय बन गए। गोटबाया उनके शीर्ष रक्षा मंत्रालय अधिकारी थे जिन्होंने लिट्टे के खिलाफ सैन्य अभियान की निगरानी की। गोटबाया की जीत राजपक्षे परिवार को फिर से देश की सत्ता में ले आई है। महिंदा राजपक्षे पिछले राष्ट्रपति चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से हार गये थे।
सिरिसेना ने नहीं लड़ा था चुनाव
बता दें कि वर्ष 2015 में राष्ट्रपति चुने गए सिरिसेना इस बार चुनाव नहीं लड़ा। श्रीलंका में राष्ट्रपति सिरिसेना के उत्तराधिकारी को चुनने के लिए शनिवार को मतदान हुआ था। मतदान से कुछ घंटे पहले उत्तर-पश्चिम श्रीलंका में अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं को ले जा रही बसों के एक काफिले पर कुछ बंदूकधारियों ने हमला भी किया था।
राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार कुल मिलाकर लगभग 80 फीसदी मतदान हुआ। मतदान संपन्न होने के बाद प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पत्रकारों से कहा कि हमने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित की है। यह एक ऐसी उपलब्धि है जिससे हम सभी खुश हो सकते हैं।