Sri Lanka Crisis: ranil wickramasinghe and Gy
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श्रीलंका में टैक्स में की गई बढ़ोतरी लंबी अवधि में देश के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। ये चेतावनी आर्थिक विशेषज्ञों ने दी है। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार ने बुधवार को नई टैक्स नीति का एलान किया। इसमें प्रत्यक्ष करों में भारी वृद्धि की गई है। इस समय वित्त मंत्रालय खुद विक्रमसिंघे के पास है। उनके दस्तखत से जारी सरकारी आदेश (गजट) में नए करों का एलान किया गया है। विश्लेषकों के मुताबिक अगर नए कर ढांचे को संसद की मंजूरी मिल गई, तो देश में कर ढांचा 2019 की तरह का हो जाएगा। 2019 में राष्ट्रपति बनने के बाद गोटाबया राजपक्षे ने कई करों को हटा दिया था और कुछ करों की दरें घटा दी थीं।
विश्लेषकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज पाने की कोशिश में जुटी विक्रमसिंघे सरकार के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। आईएमएफ ने कर्ज के बदले श्रीलंका पर राजकोषीय सेहत सुधारने की शर्त लगाई हुई है। नए कर ढांचे के मुताबिक अब श्रीलंका में एक लाख रुपये प्रति महीने से अधिक कमाने वाले व्यक्ति 30 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा। पांच लाख रुपये से अधिक आमदनी पर 36 फीसदी टैक्स लगेगा। कॉरपोरेट टैक्स को 24 से बढ़ा कर 30 फीसदी कर दिया गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक 2019 में देश में महंगाई दर बहुत कम थी। उस समय टैक्स की इतनी ऊंची दर चुकाना आज जितना मुश्किल नहीं था। अभी देश में मुद्रास्फीति दर लगभग 70 फीसदी है। इससे लोगों की वास्तविक आय काफी घट गई है। जबकि टैक्स दर को पुराने स्तर पर ले जाने का प्रस्ताव किया गया है। मार्केट फर्म नेशन लंका इक्विटीज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ धनुष्का समरासिंघे ने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम से कहा- ‘निजी टैक्स दरों में भारी वृद्धि से कर्मचारी हतोत्साहित होंगे और मध्य वर्गीय परिवारों की जिंदगी पर खराब असर पड़ेगा। ऊंची मुद्रास्फीति के इस दौर में इस कदम से प्रतिभाएं देश छोड़ कर जाने के लिए मजबूर हो जाएंगी।’
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार ने यह कदम संभवतया घबराहट की स्थिति में उठाया है। उसका ध्यान तुरंत सरकारी राजस्व बढ़ाने पर है, जबकि इस कदम के दूरगामी प्रभाव नकारात्मक होंगे। समरासिंघे ने कहा- ’30 फीसदी की टैक्स दर नए निवेश और रोजगार सृजन को हतोत्साहित करेगी। अब देखने की बात होगी कि क्या इससे निर्यात करने वाले कारखानों का मनोबल भी गिरता है।’
श्रीलंका में 2019 में टैक्स-जीडीपी अनुपात 12.7 फीसदी था। राजपक्षे सरकार के समय यह गिर कर 8.7 फीसदी रह गया। समझा जाता है कि राजपक्षे सरकार की टैक्स छूट की नीति से देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ी और श्रीलंका कर्ज संकट में फंस गया। अब विक्रमसिंघे टैक्स दर को फिर 2019 के स्तर पर ले गए हैं। लेकिन इस बीच लोगों की टैक्स चुकाने की क्षमता कमजोर हो चुकी है। एक वित्तीय विश्लेषक ने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट से कहा- नई टैक्स दरों से लोग के पास खर्च करने योग्य कम पैसा बचेगा। इसलिए ऐसे बहुत पेशेवरकर्मी जो अभी श्रीलंका में रह कर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, वे विदेश चले जाने के लिए मजबूर हो जाएंगे।