Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe
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श्रीलंका (Sri Lanka) के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे (Ranil Wickremesinghe) ने एलान किया है कि देश की स्वतंत्रता की 75वीं सालगिरह से ठीक पहले देश अपने सबसे बुरे समय से उबर गया है। विक्रमसिंघे ने नव वर्ष के मौके पर दिए अपने संदेश में कहा- ‘सबसे बुरे वक्त से गुजरने के बाद अब हम नव वर्ष 2023 की तरफ देख रहे हैं। पिछले वर्ष हमने हर तरह की कठिनाइयां, अनिश्चितताएं, और निराशाओं को झेला। मुझे यकीन है कि उस दौर से हम निकल चुके हैं।’
लेकिन जब राष्ट्रपति ने यह दावा किया, उसी रोज यह खबर आई कि 2022 में रिटायर हुए 30 हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों की जगह को भरने के लिए नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि श्रीलंका सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को यह दिखा सके कि वह सरकारी खर्च घटाने के प्रति गंभीर है। आईएमएफ ने कर्ज की नई किस्त देने के लिए जो शर्तें लगाई हैं, उनमें सरकारी खर्च में भारी कटौती भी शामिल है।
वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम की एक खबर के मुताबिक श्रीलंका सरकार ने खर्च घटाने की कोशिश में कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र को 65 से घटा कर 60 साल कर दिया। इस कारण पिछले साल सामान्य से अधिक संख्या में कर्मचारी रिटायर्ड हुए। जो हजारों कर्मचारी रिटायर्ड हुए हैं, उनमें बड़ी संख्या रक्षा से जुड़े कर्मियों की भी है। बताया जाता है कि आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए रक्षा क्षेत्र के लगभग 16 हजार कर्मचारियों को रिटायर्ड कराया गया है।
सरकारी सूत्रों ने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट को बताया कि वित्तीय दिक्कतों के कारण फिलहाल किसी नए कर्मचारी की भर्ती नहीं की जाएगी। आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए भी ऐसा करना जरूरी है। आईएमएफ श्रीलंका को चार साल की अवधि में 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज देने पर सहमत हुआ है। लेकिन उसने कहा है कि यह रकम पाने के लिए श्रीलंका को कई शर्तों का पालन करना होगा। वे शर्तें पूरी ना होने के कारण अभी तक श्रीलंका को आईएमएफ से कोई रकम नहीं मिली है, जबकि नए ऋण का समझौता चार महीने पहले ही हो गया था।
आईएमएफ की शर्तें पूरी करने के लिए विक्रमसिंघे सरकार ने देश में कई तरह के टैक्स में बढ़ोतरी की है। इनमें जरूरी सार्वजनिक सेवाओं का शुल्क भी है। देश में महंगाई की दर अभी भी लगभग 70 फीसदी है। प्रति डॉलर श्रीलंकाई मुद्रा की कीमत लगभग 370 डॉलर बनी हुई है। विश्लेषकों के मुताबिक इन तमाम स्थितियों के रहते राष्ट्रपति विक्रमसिंघे का सबसे बुरा दौर गुजर जाने का एलान करना अजीब-सा है।
श्रीलंका इस वर्ष फरवरी में ब्रिटिश साम्राज्य से अपनी आजादी की 75वीं सालगिरह मनाएगा। लेकिन आर्थिक संकट के कारण इस मौके पर देश में कोई खास उत्साह नहीं है। विक्रमसिंघे ने अपने संदेश में कहा- ‘सचमुच 2023 वह वर्ष बनेगा, जब हम अपनी अर्थव्यवस्था की सूरत बदलने की योजना बनाएंगे।’ विश्लेषकों के मुताबिक यह योजना क्या होगी, अभी तक सरकार ने उसका खाका देश के सामने नहीं रखा है। इस बीच देश में आम जन भारी मुसीबत और मायूसी में जिंदगी गुजार रहे हैं।