Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe
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श्रीलंका के आंदोलनकारी एक बार फिर देश की सरकार को झुकाने में कामयाब होते दिख रहे हैं। खबर है कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे उस सरकारी आदेश को रद्द करने की तैयारी में हैं, जिसके तहत कोलंबो को प्रमख सरकारी और कारोबारी इलाकों को हाई सिक्योरिटी जोन घोषित कर दिया गया था। राष्ट्रपति के इस आदेश के खिलाफ कोलंबो में एक बार फिर जन विरोध भड़क उठा। श्रीलंका की बार एसोसिएशन ने भी इस आदेश का विरोध किया है। उसने राष्ट्रपति के इस कदम को अवैध करार दिया है।
अब वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम ने दो सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि विक्रमसिंघे अपना ये आदेश वापस लेने पर राजी हो गए हैं। एक सूत्र ने बताया- राष्ट्रपति ने इस बारे में अटार्नी जनरल की राय मांगी है। अगर अटार्नी जनरल ने इस आदेश के कानून आधार को गलत ठहराया, तो इसे रद्द कर दिया जाएगा। दूसरे सूत्र ने इस वेबसाइट से कहा कि राष्ट्रपति ने इस आदेश पर दस्तखत सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की सिफारिश पर किया था। लेकिन अब इसकी दोबारा जांच की जा रही है।
बताया जाता है कि इस आदेश का कोलंबो की व्यापारिक गतिविधियों पर खराब असर हुआ है। अर्थशास्त्रियों ने इसके प्रभावों बारे में राष्ट्रपति को अपनी राय बताई है। सूत्रों ने बताया- अधिकारियों ने राष्ट्रपति से कहा है कि कारोबारी इलाके को हाई सिक्योरिटी जोन बनाने का असर उससे भी खराब पड़ेगा, जैसा कभी-कभार होने वाले सरकार विरोधी प्रदर्शनों का होता है।
समझा जाता है कि अब राष्ट्रपति ने सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय से कहा है कि वह हाई सिक्योरिटी जोन की जगह उस क्षेत्र के लिए एक विशेष सुरक्षा योजना तैयार करे। इसके लिए वह खुफिया एजेंसियों और अटार्नी जनरल से पहले राय-मशविरा करे। सरकारी सूत्रों ने संभावना जताई कि विक्रमसिंघे अपनी जापान यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हाई सिक्योरिटी जोन संबंधी आदेश को रद्द कर देंगे।
राष्ट्रपति ने ये आदेश 23 सितंबर को जारी किया था। कहा गया था कि कोलंबो में महीनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के लिए ये कदम उठाया गया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक देश में बढ़ती महंगाई और बिगड़ते आर्थिक हालात के कारण फिर से जन प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। इन्हें देखते हुए राष्ट्रपति ने एहतियाती कदम उठाया। लेकिन ये कदम उलटा पड़ा है। इस पर जनता में नए सिरे से गुस्सा भड़कने के संकेत मिले हैँ।
इस आदेश के तहत जिन स्थानों को हाई सिक्योरिटी जोन घोषित किया गया था, उनमें राष्ट्रपति निवास, राष्ट्रपति सचिवालय, संसद, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, कोलंबो मजिस्ट्रेट कोर्ट, अटार्नी जनरल का दफ्तर, प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, और सेना- नौसेना- वायुसेना के मुख्यालय शामिल हैं। देश में 26 वर्ष तक चले गृह युद्ध के दौरान इन स्थानों को हाई सिक्योरिटी जोन बनाए रखा गया था। 2009 में गृह युद्ध खत्म होने के बाद वह आदेश हटा लिया गया था।
इस वर्ष जुलाई मे सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन और सचिवालय सहित कई प्रमुख सरकारी भवनों पर कब्जा जमा लिया था। बताया जाता है कि विक्रमसिंघे ऐसा फिर होने की आशंका से भयभीत हैं। इसीलिए उन्होंने इन क्षेत्रों को हाई सिक्योरिटी जोन घोषित किया।