श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के बड़े भाई महिन्दा राजपक्षे आज देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। गोताबाया राजपक्षे ने बुधवार को अपने बड़े भाई और पूर्व राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को फिर से पीएम बनाने का फैसला किया था।
महिंदा राजपक्षे 2005 से 2015 के बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनके शासनकाल में गोताबाया के हाथों में रक्षा विभाग की कमान थी। वह दो बार प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। पेशे से वकील महिंदा राजपक्षे 1970 में पहली बार श्रीलंका की संसद के लिए चुने गए थे। पहली बार वह 2004 में प्रधानमंत्री चुने गए, लेकिन अगले ही साल वह राष्ट्रपति पद तक पहुंच गए।
इसके बाद पिछले साल 26 अक्तूबर 2018 को उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रधानमंत्री चुना। मगर कुछ ही महीनों में उन्हें पद गंवाना पड़ा।
राजपक्षे का साल 2015 तक श्रीलंका की राजनीति पर दबदबा था। उनके पश्चिमी देशों के साथ संबंध अच्छे नहीं माने जाते हैं। इसकी वजह श्रीलंका में साल 2009 में खत्म हुए गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप हैं।
श्रीलंका सरकार, सेना और अलगावदी तमिल टाइगर दोनों पर ही मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान हज़ारों आम लोग मारे गए थे।