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Sri Lanka: लोगों को लुभा नहीं पा रही हैं विक्रमसिंघे की महत्त्वाकांक्षी घोषणाएं

Wed, 31 Aug 2022 04:27 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

Sri Lanka: मंगलवार शाम सैकड़ों यूनिवर्सिटी छात्र कोलंबो की सड़कों पर उतर आए। उन्होंने आर्थिक संकट के समाधान के साथ-साथ हाल के सरकार विरोधी आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई की मांग भी की...
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Sri lanka - फोटो : ANI (File Photo)
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विस्तार
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श्रीलंका में नया बजट पेश होने के साथ ही नौजवानों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला है। मंगलवार को राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अगले वर्ष का अंतरिम बजट पेश किया। इसमें राजस्व जुटाने और कर्ज घटाने के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित किए गए। लेकिन शुरुआती संकेतों के मुताबिक ये बजट देश में उम्मीद जगाने में नाकाम रहा है। मंगलवार शाम सैकड़ों यूनिवर्सिटी छात्र कोलंबो की सड़कों पर उतर आए। उन्होंने आर्थिक संकट के समाधान के साथ-साथ हाल के सरकार विरोधी आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई की मांग भी की।

श्रीलंका अपनी आजादी के बाद के सबसे गंभीर आर्थिक संकट में है। सरकार विरोधी आंदोलन के कारण तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे को देश छोड़ कर भागना पड़ा और विक्रमसिंघे नए राष्ट्रपति बने। लेकिन विक्रमसिंघे सरकार लोगों की मुश्किलों का हल निकालने में नाकाम रही है। नया कर्ज पाने और पुराने कर्ज को चुकाने की समयसीमा फिर से तय करने के लिए उसकी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बातचीत चल रही है। लेकिन उसमें अभी तक किसी ठोस प्रगति के संकेत नहीं है। श्रीलंका ने बीते अप्रैल में खुद को कर्ज चुकाने में अक्षम (डिफॉल्टर) घोषित कर दिया था।

नए बजट में जीडीपी की तुलना में टैक्स अनुपात को लगभग दोगुना करने का प्रस्ताव किया गया है। फिलहाल ये अनुपात 8.2 फीसदी है, जिसे 15 फीसदी करने का प्रस्ताव किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार पहले ही वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) की दर बढ़ा कर 8 से 12 फीसदी कर चुकी है। राष्ट्रपति ने अब टैक्स रिटर्न भरना हर नागरिक के लिए अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद 2025 तक जीडीपी की तुलना में टैक्स उगाही की मात्रा में दो प्रतिशत बढ़ोतरी करना है। इसे बाद में और बढ़ाया जाएगा।

लेकिन विश्लेषकों ने कहा है कि राष्ट्रपति ने अति महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। सिकुड़ती अर्थव्यवस्था के बीच इसे हासिल करना संभव नहीं है। नेशन लंका इक्विटी नाम की कंपनी के सीईओ धनुषा समरासिंघे ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से कहा- ‘बजट में राजकोषीय सेहत सुधारने के लिए ध्यान आसान उपायों पर केंद्रित किया गया है। आर्थिक मुश्किलों के दौर में तय किए गए राजस्व लक्ष्य अति महत्त्वाकांक्षी मालूम पड़ते हैं।’

आलोचकों का कहना है कि विक्रमसिंघे सरकार वैट में बढ़ोतरी कर गरीब और मध्य वर्ग पर बोझ और बढ़ा रही है। जबकि उसने धनी तबकों से ज्यादा टैक्स वसूलने की कोई अतिरिक्त योजना पेश नहीं की है। इसके लिए सरकार वेल्थ टैक्स और उत्तराधिकार कर की ऊंची दरें तय करने पर विचार कर सकती थी।

अंतरिम बजट में अनुमान लगाया गया है कि पिछले महीने देश में मुद्रास्फीति की दर 66.7 फीसदी रही। सरकार ने इसे घटाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन साथ ही उसने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना भी जताई है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे अंतर्विरोधी कदमों के बीच तालमेल बनाना मुश्किल होगा। इस बीच सरकार की स्थिरता को लेकर भी सवाल लगातार बने हुए हैँ। मंगलवार के छात्र प्रदर्शन को इस बात का संकेत माना गया है कि लोगों का सब्र एक बार फिर जवाब देने लगा है।

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