श्रीलंका के 26वें प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि वह अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ करीबी रिश्ते बनाने को लेकर आशान्वित हैं। उन्होंने भीषण संकट में फंसे श्रीलंका की वित्तीय मदद के लिए भारत और पीएम नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया। उधर, कोलंबो में जुटे प्रदर्शनकारियों ने नए पीएम की नियुक्ति के बावजूद सरकार विरोधी अभियान जारी रखने का संकल्प लिया।
इससे पहले विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि सबसे खराब आर्थिक संकट जिसने द्वीप राष्ट्र में दुख और अशांति पैदा की है, वह बेहतर होने से पहले और भी खराब होने वाला है। श्रीलंका को भारी ईंधन की कमी और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ श्रीलंकाई लोगों को भोजन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। 26वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने वाले विक्रमसिंघे ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि देश में परिवारों को दिन में तीन बार भोजन मिले। दुनिया से और अधिक वित्तीय मदद की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि भूख का संकट नहीं होगा, हम भोजन पाएंगे।
बता दें, भारत ने इस साल जनवरी से लेकर अब तक श्रीलंका को तीन अरब डॉलर से अधिक का कर्ज दिया है। जबकि श्रीलंका पिछले दो दशकों में सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है। विक्रमसिंघे ने कहा, उनका ध्यान आर्थिक संकट से निपटने पर केंद्रित है। मैं समस्या को सुलझाना चाहता हूं ताकि पेट्रोल, डीजल और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। इस बीच, नए पीएम की नियुक्ति भी देश में राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन को नाकाम करने में कामयाब नहीं रही है। कोलंबो में डेरा डाले प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हमारी लड़ाई तब तक नहीं रुकेगी जब तक लोगों को राहत नहीं मिलती। हमें न्याय चाहिए।
भारतीय उच्चायुक्त से मिले विक्रमसिंघे, मदद पर चर्चा
प्रधानमंत्री बनने के बाद रानिल विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को पहली बार भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले को बुलाकर बातचीत की और आर्थिक संकट के समय वित्तीय मदद के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। भारतीय दूतावास ने एक ट्वीट में बताया, नए पीएम के साथ लोकतांत्रिक तरीके से श्रीलंका के लोगों की भलाई, देश में आर्थिक स्थिति सुधारने और स्थायित्व पर चर्चा हुई।
भारतीय उच्चायोग बोला, श्रीलंका में वीजा जारी करने पर रोक नहीं
श्रीलंका स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस बात से साफ तौर पर इनकार किया कि उसने देश में वीजा जारी करने पर रोक लगा दी है। उच्चायोग ने कहा, वीजा प्रकोष्ठ के कर्मचारियों के दफ्तर न आने के कारण संचालनात्मक दिक्कतों से यह बाधा आई थी। इनमें से अधिकांश कर्मी श्रीलंकाई नागरिक हैं। उसने कहा, वह जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रहा है। हम भारत में श्रीलंकाई नागरिकों की यात्रा सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। श्रीलंका में भारतीयों की तरह ही भारत में श्रीलंकाई नागरिकों का स्वागत है।
राष्ट्रपति के खिलाफ जारी प्रदर्शन नहीं रोकेंगे
पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद देश में भड़की हिंसा के बाद नए पीएम बने रानिल विक्रमसिंघे ने कहा, वे राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के खिलाफ जारी मुख्य प्रदर्शन को जारी रहने देंगे। उन्होंने कहा, यदि प्रदर्शनकारी चाहेंगे तो मैं उनसे बात करूंगा। यह पूछने पर कि क्या उन्हें इस्तीफा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन की आशंका है, इस पर विक्रमसिंघे ने कहा कि वह उनका सामना करेंगे। उन्होंने कहा, यदि मैं आर्थिक संकट से निपटने का जिम्मा उठा सकता हूं तो मैं इससे भी निपट सकता हूं।
अमेरिका का समावेशी सरकार के गठन का आह्वान
श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत जूली चुंग ने नवनियुक्त पीएम को बधाई देते हुए आह्वान किया कि देश में आर्थिक संकट दूर करने और स्थायित्व लाने के लिए एक समावेशी सरकार का गठन किया जाएगा। चुंग ने कहा, हम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में सार्थक प्रगति और लंबे समय तक चलने वाले समाधान का समर्थन करते हैं जिससे श्रीलंका के लोगों की जरूरतें पूरी हों।
हिंसा के दौरान सांसद की मौत खुदकुशी नहीं, हत्या : पुलिस
श्रीलंका में सत्तारूढ़ दल के जिस पूर्व सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला की नित्तमबुवा शहर में हिंसक झड़प के दौरान मौत हो गई थी, उन्होंने खुदकुशी नहीं की बल्कि भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला था। सोमवार को हुई इस हत्या की जानकारी पुलिस ने शुक्रवार को दी। पहले दावा किया गया था 57 वर्षीय अथुकोरला को भीड़ ने घेर लिया था जिसके बाद उन्होंने दो लोगों पर गोली चलाई और फिर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।