श्रीलंका में 2019 के भयावह ईस्टर बम धमाकों की जांच में बड़ा मोड़ आया है। पुलिस ने देश की पूर्व राज्य खुफिया सेवा के प्रमुख सुरेश सैली को इस मामले में संदिग्ध बताया है। इस खुलासे के बाद मामले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। पुलिस की आपराधिक जांच विभाग ने अदालत में कहा कि इस बड़े आतंकी हमले के पीछे असली साजिश और मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया गया है। इस मामले में पहले से ही कई संदिग्धों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और अब जांच एजेंसियां नई कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट अदालत में पुलिस की आपराधिक जांच विभाग ने बताया कि पूर्व खुफिया प्रमुख सुरेश सैली को इस मामले की जांच में संदिग्ध के रूप में नामित किया गया है। उन्हें पिछले महीने 25 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी उस साजिश का पता लगाने के लिए की गई है जिसके तहत 2019 में श्रीलंका में कई जगहों पर एक साथ आत्मघाती हमले किए गए थे।
क्या था 2019 का ईस्टर आतंकी हमला?
21 अप्रैल 2019 को ईस्टर संडे के दिन श्रीलंका में सिलसिलेवार आत्मघाती बम धमाके हुए थे। इन धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। आत्मघाती हमलावरों ने तीन चर्च और तीन लग्जरी होटलों को निशाना बनाया था। इस हमले में 270 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में 11 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इन हमलों के पीछे स्थानीय इस्लामिक चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात का नाम सामने आया था, जिसका संबंध आतंकी संगठन आईएसआईएस से बताया गया था।
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क्या पहले से थी हमले की खुफिया जानकारी?
हमलों के बाद यह आरोप सामने आए थे कि श्रीलंका की सुरक्षा एजेंसियों के पास पहले से हमले की चेतावनी थी। बताया गया था कि भारत सहित कुछ देशों ने संभावित हमले की जानकारी साझा की थी। इसके बावजूद समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। उस समय के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना की सरकार पर आरोप लगा था कि उसने खुफिया चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया।
सुरेश सैली की भूमिका क्या रही?
सुरेश सैली एक सेवानिवृत्त मेजर जनरल हैं और वह पहले राज्य खुफिया सेवा के प्रमुख रह चुके हैं। वर्ष 2015 से पहले राजपक्षे सरकार के दौरान उन्होंने इस पद पर काम किया था। जब 2019 में यह हमला हुआ, तब वह विदेश में एक राजनयिक पद पर तैनात थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश थी और क्या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही या छुपाव हुआ था।
जांच फिर से क्यों शुरू की गई?
श्रीलंका की मौजूदा नेशनल पीपुल्स पावर सरकार ने वर्ष 2024 के आखिर में इस मामले की जांच दोबारा शुरू की थी। सरकार का कहना था कि पहले इस मामले की जांच पर राजनीतिक दबाव पड़ा था और कई अहम तथ्यों को दबा दिया गया था। नई जांच का उद्देश्य हमले के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना और पूरी सच्चाई सामने लाना है। इसी प्रक्रिया के तहत अब पूर्व खुफिया प्रमुख को भी जांच के दायरे में लाया गया है।
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