श्रीलंका में एक कठोर आतंकवाद विरोधी कानून की जगह नए आतंकवाद विरोधी विधेयक को पेश किया जाना है। श्रीलंका के न्याय मंत्री विजयदास राजपक्षे ने गुरुवार को घोषणा की कि नए आतंकवाद विरोधी विधेयक को संसद में पेश करने में थोड़ी देरी हो सकती है। वहीं वकीलों ने कहा कि कोई भी कानून जो कानून के शासन और नागरिकों की स्वतंत्रता को कमजोर करेगा उसे चुनौती दी जाएगी। इन सबके बीच लोगों में भी बिल के पास होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यह है मामला
बता दें, नया आतंकवाद विरोधी अधिनियम (एटीए) 1979 के बहुचर्चित आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पीटीए) की जगह लेगा।श्रीलंका पीटीए को एक नए कानून के रूप में तब्दील कर रहा है, जिसे एंटी टेररिज्म एक्ट (एटीए) कहा जाता है। पीटीए को उसकी सख्ती के लिए जाना जाता है। इसकी कानून की कई बार निंदा हो चुकी है। अगर कानून के बारे में बताए तो इसमें लोगों को अनिश्चित काल के लिए दोषी सिद्ध किए बिना हिरासत में रखने की अनुमति दी गई थी। बढ़ते तमिल अलगाववादी उग्रवाद का मुकाबला करने के लिए एक अस्थायी उपाय के रूप में 1979 में लागू किए गए पीटीए को निरस्त करने के लिए श्रीलंका को अंतरराष्ट्रीय निंदा का सामना करना पड़ा।
बिल जारी होने में देरी
राष्ट्रपति रनिल ने हाल ही में कहा था कि नए एटीए को जून तक पेश कर दिया जाएगा। वहीं, एक अप्रैल को प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने ने बताया था कि नए आतंकवाद विरोधी अधिनियम को इस महीने के बाद पेश किया जाएगा। हालांकि न्याय मंत्री का कहना है कि बिल पेश होने में और देरी हो सकती है।
हितधारकों से नहीं ली गई सलाह
श्रीलंका के वकीलों के निकाय बार एसोसिएशन ने देरी की वजह बताते हुए कहा कि मसौदा विधेयक तैयार करने में हितधारकों से कोई सलाह नहीं ली गई थी। 17 मार्च को, 97 पृष्ठों का नया आतंकवाद विरोधी अधिनियम (एटीए) सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। अब विपक्ष और नागरिक समाज समूहों ने नए एटीए पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने में तत्कालीन सरकार की विफलता पर पिछले साल के मध्य में हुए नागरिक समाज के विरोध को दिखाता है।