विदेशी मुद्रा के संकट से लगातार जूझ रही श्रीलंका सरकार को अब रामायण में समाधान नजर आया है। राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार रामायण से जुड़े स्थलों की पहचान करने और उन्हें पर्यटन स्थल बनाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। सरकार अब तक ऐसे 50 स्थलों की पहचान कर चुकी है। अब इनका इस्तेमाल भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए किया जाएगा। इसके लिए श्रीलंका का पर्यटन मंत्रालय भारत में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाएगा।
इसके अलावा श्रीलंका सरकार बौद्ध धर्म से जुड़े स्थलों की पहचान भी कर रही है। उन स्थलों से खास कर जापान और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के सैलानियों को आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी। इन देशों के सैलानी पहले भी बड़ी संख्या में श्रीलंका आते थे। लेकिन 2019 के बाद से इनकी संख्या में काफी गिरावट आई है।
श्रीलंका पर्यटन प्रोत्साहन विभाग के निदेशक जीवना फर्नांडो ने बताया है कि रामायण से जुड़े जिन 50 स्थलों की पहचान की गई है, उनके बारे में भारत के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका में भी लोगों को सूचित किया जाएगा। उन देशों में बड़ी संख्या में भारतवंशी या ऐसे लोग रहते हैं, जिनकी रामायण में दिलचस्पी रही है। वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘जब हम अपनी बहुलता पर गौर करते हैं, तो साफ होता है कि इसके जरिए हम बड़ी संख्या में भारत और बौद्ध देशों के पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं।’
इस वर्ष के पहले एक महीने में भारत के 13,759 पर्यटकों ने श्रीलंका की यात्रा की। जानकारों के मुताबिक श्रीलंका के पर्यटन उद्योग की आमदनी के लिए भारत के सैलानी एक बड़ा जरिया रहे हैं। फर्नांडो ने कहा है- ‘पिछले साल हमने भारत में रामायण टूरिज्म को लेकर बड़ा विज्ञापन अभियान चलाया। बौद्ध टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हमने कैंडी एसला पेरहरा समारोह की सात भाषाओं में लाइव स्ट्रीमिंग की। इस वर्ष इसकी 20 भाषाओं में लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।’
पिछले साल श्रीलंका में कुल 7,19,978 पर्यटक आए थे। इनमें से 1,23,004 सैलानी भारत से आए। फर्नांडो ने कहा- ‘ज्यादातर भारतीय सैलानी यहां छुट्टियां मनाने आते हैं, लेकिन वे कम से कम एक रामायण स्थल पर जरूर जाते हैं। भविष्य में रामायण स्थलों पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या बौद्ध स्थलों पर जाने वाले सैलानियों की तुलना में ज्यादा हो जाएगी।’
जानकारों के मुताबिक बहुत से भारतीय अब डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी श्रीलंका आ रहे हैं। इससे देश के पर्यटन उद्योग में उनका योगदान बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों ने बताया है कि इस वर्ष जनवरी में पिछले साल की तुलना में 24.5 फीसदी अधिक पर्यटक श्रीलंका आए। इस आंकड़े से श्रीलंका सरकार उत्साहित हुई है। पर्यटन उद्योग श्रीलंका का प्रमुख सहारा रहा है। 2019 में ईस्टर पर हुए बम धमाकों के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट शुरू हुई थी। कोरोना महामारी के दौरान यह उद्योग बिल्कुल ठप हो गया। श्रीलंका में पैदा हुए आर्थिक संकट के लिए इसे सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं में एक माना गया है।