श्रीलंका में गहराते खाद्य संकट के बीच अब गोटबया राजपक्षे सरकार ने किसानों से हालत संभालने की गुजारिश की है। सरकार ने साफ कहा है कि खाने-पीने की चीजों की कमी और गंभीर रूप लेने जा रही है। इससे महंगाई और भी ज्यादा बढ़ने का अंदेशा है। श्रीलंका में मुद्रास्फीति की दर पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है। ऐसे में कृषि मंत्री महिंद अमरावीरा के ताजा बयान को इस बात का संकेत समझा गया है कि हालात अभी भी बेकाबू हैं।
इसके पहले प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे चेतावनी दे चुके हैं कि अगली अगस्त से देश में खाद्य पदार्थों का बेहद गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक अपने इसी आकलन के कारण अब सरकार अनाज पैदावार बढ़ाने की नई योजना बना रही है। अमरावीरा ने कहा- ‘यह स्पष्ट है कि खाद्य हालात बदतर हो रहे हैं। ऐसे में हम किसानों से गुजारिश करते हैं कि वे अगले पांच से दस दिन तक अपने खेतों में जाएं और अधिक मात्रा में धान की रोपाई करें।’
श्रीलंका की खाद्य आयुक्त जे. कृष्णमूर्ति ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि सरकार ने सार्क (दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संघ) से खाद्य बैंक बनाने के बारे में सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका ने सार्क के सदस्य दूसरे देशों से अनुदान के रूप में एक लाख मिट्रिक टन अनाज की मांग की है। सार्क की इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया रही है, इस बारे में पूछे जाने पर कृष्णमूर्ति कोई साफ जवाब नहीं दिया।
इसी मंगलवार को श्रीलंका सरकार ने वैट की दरें बढ़ाने की घोषणा की है। यह दर अब आठ से बढ़ा कर 12 फीसदी कर दी गई है। श्रीलंका सरकार को उम्मीद है कि इससे उसे 65 अरब रुपये (लगभग 18 करोड़ डॉलर) की अतिरिक्त आमदनी होगी। साथ ही सरकार ने अगले अक्तूबर से कॉरपोरेट टैक्स 24 से बढ़ा कर 30 फीसदी करने का फैसला किया है। श्रीलंका के वित्त मंत्री अली साबरी के मुताबिक अगले आठ महीनों में जरूरी चीजों के आयात पर श्रीलंका सकार को चार बिलियन डॉलर खर्च करने होंगे।